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केयू की बहुभाषी अनुवाद कार्यशाला ज्ञान, संस्कृति और साहित्य का संगम

तीन दिवसीय बहुभाषी अनुवाद कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 12 सितम्बर : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में पंजाबी विभाग द्वारा साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय बहुभाषी अनुवाद कार्यशाला अपने तीसरे और अंतिम दिन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला का सफल संचालन निदेशक प्रो. रवेल सिंह के कुशल नेतृत्व में और संयोजक डॉ. कुलदीप सिंह के सहयोग से हुआ, जिन्होंने सभी चार तकनीकी सत्रों का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया। उनके प्रयासों ने कार्यशाला को न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया, बल्कि इसे सांस्कृतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली बनाया।
तीसरे दिन आयोजित चार तकनीकी सत्रों में आठ भाषाओं डोगरी, अंग्रेज़ी, हिन्दी, कश्मीरी, पंजाबी, राजस्थानी, संस्कृत और उर्दूकृ के विद्वान अनुवादकों ने भाग लिया। इन सभी अनुवादकों ने अपनी गहन विद्वता और संवेदनशील प्रस्तुतियों के माध्यम से अनुवाद को ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता का सेतु सिद्ध किया।
इन तीन दिनों की अवधि में, आठ विभिन्न भाषाओं की 14 लघु-कथाओं का सटीक और संवेदनशील अनुवाद किया गया। इन 14 लघु-कथाओं को साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा शीघ्र ही आठ अलग-अलग भाषाओं में पुस्तकों के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जो बहुभाषी साहित्यिक संवाद की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
समापन अवसर पर संयोजक डॉ. कुलदीप सिंह ने कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पाल, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली के प्रधान डॉ. माधव कौशिक, प्रो. रवेल सिंह (अध्यक्ष, पंजाबी सलाहकार बोर्ड, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली) तथा कार्यशाला से जुड़ी सभी भाषाओं के विद्वानों और अनुवादकों का धन्यवाद किया। साथ ही, पंजाबी विभाग के अध्यापकों में डॉ. गुरप्रीत और डॉ. देवेंद्र, शोधार्थियों और प्रशासनिक सहयोगियों के विशेष योगदान को भी रेखांकित किया गया। विशेष धन्यवाद डॉ. लता खेड़ा को दिया गया जिन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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