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उत्तराखंड देहरादूनप्रदेश में प्री SIR के तहत 1 से 15। फरवरी तक विशेष अभियान, दूसरे चरण में इन पर रहेगा फोकस

उत्तराखंड देहरादून
प्रदेश में प्री SIR के तहत 1 से 15। फरवरी तक विशेष अभियान, दूसरे चरण में इन पर रहेगा फोकस,
सागर मलिक

उत्तराखंड में स्पेशल रिवीजन (SR) यानी प्री-SIR से पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची सुधार का अभियान तेज कर दिया है। राज्यभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं, ताकि नाम, पता और पारिवारिक विवरण से जुड़ी त्रुटियों को समय रहते सुधारा जा सके।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (ACEO) डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब तक राज्य में लगभग 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने इसे संतोषजनक प्रगति बताया, हालांकि देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिलों में कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी है। देहरादून में केवल 57 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में 59 प्रतिशत मैपिंग ही पूरी हो पाई है। इन दोनों जिलों में प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. जोगदंडे ने बताया कि सभी BLO मतदाताओं से लगातार संपर्क में हैं और BLO ऐप के माध्यम से न केवल मैपिंग कर रहे हैं, बल्कि मतदाताओं को नाम जोड़ने, संशोधन और सुधार से जुड़ी जानकारी देकर जागरूक भी कर रहे हैं।

1 से 15 फरवरी तक विशेष अभियान
निर्वाचन विभाग 1 से 15 फरवरी तक विशेष अभियान चलाएगा, जिसमें महिलाओं और युवाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान महिला मतदाताओं के मायके से जुड़े विवरण जुटाए जाएंगे, जबकि उन युवाओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम सूची में शामिल था। इन पारिवारिक संबंधों को ‘एज ए प्रोजेनी’ के रूप में मैप किया जाएगा।

बीएलए की नियुक्ति भी तेज
राज्य में बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से 12,070 बीएलए नामित किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक नामांकन भाजपा और कांग्रेस द्वारा किया गया है। निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले एक महीने में सभी बूथों पर बीएलए की नियुक्ति पूरी हो जाएगी।

SR प्री-SIR) क्या है?
स्पेशल रिवीजन (SR) को उत्तराखंड में प्री-SIR माना जा रहा है। यह वोटर लिस्ट की सफाई और तैयारी का पहला चरण है। इस दौरान BLO घर-घर जाकर यह जांच करते हैं कि मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं, पता बदला तो नहीं, उम्र पूरी है या नहीं और पारिवारिक कड़ी सही है या नहीं। सरल शब्दों में कहें तो SR में यह देखा जाता है कि वोटर लिस्ट में दर्ज नाम वास्तव में मौजूद हैं या नहीं।

SR और SIR का संबंध
SR के बिना SIR संभव नहीं है। SR में जुटाया गया डेटा ही आगे SIR की आधार फाइल बनता है। अगर SR में गलत नाम, डुप्लीकेट एंट्री या अधूरी जानकारी रह जाती है, तो SIR के दौरान समस्याएं आती हैं। इसलिए पहले SR के जरिए वोटर लिस्ट को प्राथमिक रूप से ठीक किया जाता है, फिर SIR में उसकी गहन जांच होती है।

SIR क्या है और कब होगा?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची की सबसे सख्त और गहन जांच प्रक्रिया है। इसमें जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों के आधार पर भी सत्यापन किया जाता है। डुप्लीकेट नाम, गलत प्रविष्टियां और अपात्र मतदाताओं को हटाने का यही चरण होता है। चुनाव आयोग के अनुसार उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कराई जाएगी। फिलहाल चल रहा SR उसी की तैयारी है।

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