स्वर्णप्राशन बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण

श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में लगाया स्वर्णप्राशन शिविर, 350 से अधिक बच्चों को पिलाई अमृत बूंदे।
कुरुक्षेत्र, (संजीव कुमारी) 1 फरवरी : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में रविवार को आयुर्वेदिक अस्पताल स्थित कौमारभृत्य विभाग द्वारा स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 350 से अधिक बच्चों को स्वर्णप्राशन की अमूल्य बूंदें पिलाई गईं।
इस अवसर पर कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. वैद्य शंभु दयाल शर्मा ने बताया कि वर्तमान जीवनशैली और खानपान में आई गिरावट के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। स्वर्णप्राशन बच्चों को न केवल विभिन्न बीमारियों से बचाने में सहायक है, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि पुष्य नक्षत्र जैसे विशेष मुहूर्त में स्वर्णप्राशन देने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर (डॉ.) अमित कटारिया ने कहा कि स्वर्णप्राशन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जो बच्चों की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है। इसका नियमित सेवन बच्चों को स्वस्थ, तेजस्वी एवं बुद्धिमान बनाने में सहायक होता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने बताया कि स्वर्णप्राशन बार-बार बीमार पड़ने वाले बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। बाल्यावस्था में दिया गया यह संस्कार जीवन भर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन का अगला शिविर 27 मार्च को आयुर्वेदिक अस्पताल स्थित कौमारभृत्य विभाग में आयोजित किया जाएगा। शिविर के दौरान डॉ. श्रुति, डॉ. पंकज, डॉ. किरण, डॉ. महक, डॉ. स्वांगी, डॉ. दीक्षा, लता, भूषण सहित अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



