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नाटक उजबक राजा ने दर्शकों को गुदगुदाते हुए दिया स्वदेशी अपनाओ का संदेश

शान बढ़ाने के चक्कर में बेइज्जत हुआ उजबक राजा, ठहाकों से गूंजी चौपाल।
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में कुरुक्षेत्र के रंगकर्मियों ने दिखाए अभिनय के जौहर।
झूठी शान के लिए उजबक राजा ने लुटा दिया राजपाट, रानी से पड़ी फटकार।

कुरुक्षेत्र (प्रमोद कौशिक) 5 फरवरी : फरीदाबाद में चल रहे 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुण्ड मेले में निरंतर ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रतिभा से सभी को मोहित करते हुए महोत्सव को चार चांद लगा रहे हैं। पारम्परिक हस्तशिल्प, हथकरघा, लोक कला, देश-विदेश के व्यंजन और संस्कृति का अद्भुत संगम 31 जनवरी से लगातार भारत के सबसे बड़े मेलों में शामिल सूरजकुण्ड मेले में देखने को मिल रहा है। मेले के प्रांगण में बनी दो नम्बर चौपाल पर कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा के सौजन्य से निरंतर कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग की ओर से कुरुक्षेत्र के न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप द्वारा अलकनंदन के लिखे और विकास शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक उजबक राजा को मंचित करने का अवसर मिला। हास्य नाटक उजबक राजा में दिखाया कि अरनाखेड़ा के राजा रेशमलाल को तरह-तरह के कीमती वस्त्र पहनना अच्छा लगता है। जिसके लिए राजा राजकोष को प्रजा की भलाई की अपेक्षा अपने वस्त्रों पर अधिक खर्च करता है। एक दिन राजा को सूचना मिलती है कि उनके पड़ोसी राजा देशबंधू उनके साथ फैंसी ड्रैस प्रतियोगिता करने के लिए आ रहे हैं। फैंसी ड्रैस प्रतियोगिता का सुनकर राजा रेशमलाल देश के अलग-अलग राज्यों से दर्जी बुलाते हैं ताकि अपने लिए शानदार कपड़े बनवा सके। लेकिन राजा को कोई भी स्वदेशी कपड़े पंसद नहीं आते। बाद में राजा रेशमलाल को पता चलता है कि देशबंधू ने विदेशी दर्जियों से कपड़े तैयार करवाए हैं। जिसके कारण राजा रेशमलाल विदेशी दर्जी बुलवाने को कहता है। एक दिन दो ठग विदेशी दर्जी बनकर राजा के पास पहुंचते है और राजा को बताते हैं कि वो राजा के लिए जादू के कपड़े बनाएंगे, जो केवल खानदानी और रईसों को ही दिखाई देगी, मुर्ख या गरीब लोग कपड़े को नहीं देख पाएंगे। जादू के सूट के बदले ठग राजा से करोड़ो रुपये ऐंठ लेते हैं। जब रानी को पता चलता है तो रानी ठगों की मशीन को तोड़ देती है। लेकिन ठग राजा को बताते हैं कि रानी ने जलन के कारण राजा के जादू के सूट को खराब कर दिया। जिसके कारण नया सूट बनाने के लिए ठग राजा से और पैसे ले लेते हैं। प्रतियोगिता वाले दिन ठग राजा को नंगा करके सब धन लूटकर ले जाते हैं। जब राजा देशबंधू अरनाखेड़ा पहुंचते हैं तो पता चलता है कि वो भी नंगे हैं और राजा रेशमलाल से पहले दोनों ठग राजा देशबंधु को लूटकर आए हैं। इस प्रकार हास्य रस से भरपूर नाटक ने विदेशी निवेश को छोड़कर स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया। नाटक में राजा रेशमलाल का किरदार सूर्यांश चावला, मंत्री हितेश जंगम, रानी रचना अरोड़ा, देशबंधू गौरव दीपक जांगड़ा, विदेशी ठग का किरदार सागर शर्मा व डा. राजीव कुमार ने निभाया। अन्य किरदारों में नव्या मेहता, कनिका शर्मा, ध्रुवम गोयल, रोहित, चंचल शर्मा, कंचन यादव तथा आकाशदीप रहे। कार्यक्रम में मंच संचालन अल्पना सुहासिनी ने किया। इस अवसर पर विभाग की कला एवं सांस्कृतिक अधिकारी रेनू हुड्डा, डा. दीपिका वालिया सहित संदीप नैन, नरेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।

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