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परिस्थितियों से लड़ने के लिए आत्म बल चाहिए तो राम भजन जरूरी – पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज


जीत बहादुर लाल श्रीवास्तव

सगड़ी (आजमगढ़):राम जी को तर्क करके नहीं जाना जा सकता है। वेद जो कहते हैं उनका मान लेने में ही मनुष्य की भलाई होती है। माता पार्वती जी के पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान भोलेनाथ ने राम जी के बारे में यही सिद्धान्त दिया है।
सगड़ी तहसील के हरसिंहपुर स्थित शीतला धाम में राम कथा का अनुश्रवण कराते हुए प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि आजकल के बच्चों को जो माता-पिता पढ़ने लिखने के लिए भेजते हैं वह परिश्रम करने के बाद भी जब असफल होते हैं तो आत्महत्या की ओर अग्रसर हो जा रहे हैं। प्रतिवर्ष ऐसी दर्जनों घटनाएं सुनने को मिल रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन बच्चों को संस्कारित नहीं किया गया है। जब तक जीवन में राम भजन नहीं आएगा तब तक परिस्थितियों से लड़ने का आत्म बल नहीं प्राप्त होगा।
सनातन सद्ग्रन्थों में लिखा गया है – दैहिक, दैविक, भौतिक तापा रामराज काहू नहीं व्यापा। इस कलिकाल में जो भी भगवान में लगा रहेगा उसे कभी भी कोई पाप और ताप नहीं सताएंगे। भगवान में लगना भी सभी के वश की बात नहीं है क्योंकि हम जब कई जन्मों तक सत्कर्म करते हैं तब जाकर भगवान की ओर हमारा मन चलता है।
मनुष्य के रूप में जन्म लेना जीव का सौभाग्य मान गया है। मानव शरीर में रहकर ही जीव अपना कल्याण कर पाता है।
प्रकृति किसी को भी क्षमा नहीं करती है। सनातन धर्म और संस्कृति किसी एक व्यक्ति की बनाई हुई नहीं है। सबसे अधिक अत्याचार सनातन धर्म पर ही होते आए हैं फिर भी हमारे संस्कृति पूरे विश्व में अपना सर्वोच्च स्थान बनाये रखने में सक्षम है।

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