
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय आर्य वीर शिविर के दूसरे दिन योग, संस्कार और वैदिक चिंतन का संगम
स्वामी देवव्रत के मार्गदर्शन में हुआ योगाभ्यास, बौद्धिक सत्रों में मिला जीवन निर्माण का संदेश।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 2 जून : गुरुकुल कुरुक्षेत्र में महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा से आयोजित सार्वदेशिक आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगना दल के राष्ट्रीय शिविर के दूसरे दिन योग, अनुशासन, वैदिक संस्कार और राष्ट्र निर्माण के संदेश से परिपूर्ण विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया।
प्रातःकालीन सत्र में परम आदरणीय स्वामी देवव्रत सरस्वती के मार्गदर्शन में सभी आर्य वीरों ने योगाभ्यास किया। इस अवसर पर आचार्य नन्दकिशोर जी एवं अन्य योग शिक्षकों ने ब्रह्मचारियों को ताड़ासन, भुजंगासन, मंडूकासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। योग सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक एकाग्रता एवं आत्मिक उन्नति का महत्व समझाया गया।
इसके उपरांत आयोजित बौद्धिक सत्र में आर्य प्रतिनिधि सभा के वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द जी ने आर्य वीरांगनाओं को जीवन में अनुशासन, सेवा, संस्कार और वैदिक मूल्यों के महत्व पर प्रेरक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन को आदर्श बनाने तथा समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वहीं आचार्य नन्दकिशोर जी ने आर्य वीरों को संबोधित करते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती के सिद्धान्तों को जीवन में अपनाने तथा समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए आगे आने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज का सशक्त भविष्य संस्कारित एवं जागरूक युवाओं के हाथों में ही सुरक्षित है।
उल्लेखनीय है कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित इस राष्ट्रीय शिविर में देश के लगभग 20 राज्यों एवं प्रान्तों से आर्य वीर एवं आर्य वीरांगनाएं भाग ले रही हैं। शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को वैदिक संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास, योग, यज्ञ तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
यह शिविर युवा पीढ़ी में चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, संगठन शक्ति तथा राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।

