
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : सिविल लाइन स्थित नोमहला शरीफ दरगाह नासिर मियाँ (रहमतुल्लाह अलेह) पर दरगाह साबिर पाक कलियर शरीफ के सज्जादानशीन हज़रत शाह अली मंज़र एजाज़ कुद्दुसी साबरी अली शाह मियाँ की सरपरस्ती में उर्स की महफ़िल का आगाज़ हुआ। पीर-ए-तरीक़त हज़रत शाह मंज़र एजाज़ कुद्दुसी साबरी अलमारूफ़ शिम्मी मियाँ (रहमतुल्लाह अलेह) का 11वां एक दिवसीय उर्स-ए-पाक अक़ीदत और सादगी के साथ मनाया गया। उर्स की तक़रीबात का आग़ाज़ बाद नमाज़-ए-असर मिलाद-ए-पाक से हुआ, जिसमें उलेमा और नातख़्वाहों ने अपनी पुरअसर नात व मनकबत के ज़रिए बुज़ुर्गों की सूफ़ियाना शख़्सियत और उनकी तालीमात पर रौशनी डाली।
मिलाद के बाद कुल शरीफ की रस्म पूरी अक़ीदत के साथ अदा की गई। इस मौके पर नायब इमाम मौलाना हसन रज़ा पुर्नवी ने मुल्क की तरक़्क़ी, ख़ुशहाली, क़ौमी एकता, आपसी भाईचारे और अमन-ओ-अमान के लिए ख़ुसूसी दुआ कराई। साथ ही बीमारों की शिफा और अवाम की कामयाबी के लिए भी बारगाहे-इलाही में हाथ उठाए गए।
”दरगाह के ख़ादिम सूफ़ी वसीम मियाँ साबरी नासरी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी 11वें उर्स-ए-पाक की तमाम रस्में अदब और सादगी के साथ मुकम्मल की गईं। कुल शरीफ के मौके पर आस्ताने पर गुलपोशी व चादरपोशी कर मन्नतें और दुआएं मांगीं।”
उर्स के आख़िर में दरगाह पर मौजूद सभी अकीदतमंदों और ज़ायरीन को तबर्रुक तक़सीम किया गया। इस मुक़द्दस मौक़े पर मुख्य रूप से शाने अली कमाल मियाँ साबरी नासरी, रिज़वान साबरी, मिलाद ख़्वाह अफ़सर, मोहम्मद शाहिद कुरैशी नासरी, फहीम, सलीम साबरी, हसनैन खान और शाहिद रज़ा नूरी सहित ख़ास तौर से समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी समेत बड़ी तादाद में स्थानीय लोग और अकीदतमंद मौजूद रहे।


