
हरियाणा सरकार ने पात्र कब्जा धारकों को दी बड़ी राहत, पात्र व्यक्ति ऑनलाइन समाधान पोर्टल के माध्यम से कर सकता है आवेदन।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक : उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायतों की शामलात भूमि पर 31 मार्च 2004 या उससे पहले निर्मित 500 वर्ग गज तक के आवासीय मकानों के नियमितीकरण एवं भूमि विक्रय संबंधी आवेदनों की अंतिम तिथि 16 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी गई है। समाधान पोर्टल के जरिये आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग ने राज्य के हजारों पात्र नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब सभी पात्र व्यक्ति समाधान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित तिथि तक अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही आवेदन प्रक्रिया में ग्राम सचिव द्वारा केस अग्रेषित किए जाने, ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की कार्यवाही, बीडीपीओ की अनुशंसा तथा उपायुक्त स्तर पर होने वाली कार्रवाई की जानकारी आवेदकों को एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी तथा पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। सरकार ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) अधिनियम, 1961 में संशोधन कर पात्र मामलों में अंतिम स्वीकृति प्रदान करने की शक्ति संबंधित उपायुक्त को सौंप दी है। इस निर्णय से मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निपटारा सुनिश्चित होगा तथा पात्र नागरिकों को समय पर राहत मिल सकेगी। अब सभी नए एवं लंबित मामलों का निपटारा केवल समाधान पोर्टल के माध्यम से ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार का ऑफलाइन अथवा भौतिक आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन मामलों में पहले से भौतिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, उन्हें भी आगे की कार्रवाई से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों, ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा के प्रस्तावों सहित समाधान पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकास एवं पंचायत विभाग ने समाधान ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से आवेदक घर बैठे अपने आवेदन एवं सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। पूर्व में अनेक पात्र नागरिक वास्तविक एवं प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। विशेष रूप से डिमार्केशन (सीमांकन) रिपोर्ट प्राप्त करने में देरी, आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते बड़ी संख्या में योग्य आवेदक आवेदन करने से वंचित रह गए थे। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नियम 15-बी में संशोधन कर आवेदन अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।


