
प्राचीन लोक कलाओं को सहेजना अत्यंत जरुरी है : रेनू हुड्डा।
थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 6 जून : हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लुप्त हो रही पारंपरिक लोक कला को जीवित रखने के उद्देश्य से कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा द्वारा कला कीर्ति भवन में आयोजित तीन दिवसीय सांझी कार्यशाला के दूसरे दिन स्थानीय महिलाओं और छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागी महिलाओं ने पारंपरिक शैली को अपनाते हुए मिट्टी से विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां तैयार कीं। यह कार्यशाला विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल तथा महानिदेशक के.एम. पांडुरंग के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की चित्रकला अधिकारी रेनू हुड्डा ने बताया कि आधुनिकता के इस दौर में प्राचीन लोक कलाओं को सहेजना बेहद जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति और जड़ों से जुड़ी रह सके। सांझी हरियाणा की मिट्टी से जुड़ी एक अनूठी और अत्यंत पावन कला है, जो हमारे ग्रामीण परिवेश, लोक चेतना और त्योहारों को दर्शाती है।
मिट्टी की आकृतियों में उकेरी लोक संस्कृति।
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने मुख्य प्रशिक्षक मीनाक्षी की देखरेख में सांझी कला की सूक्ष्म बारीकियों को सीखा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने बड़ी ही श्रद्धा और कलात्मकता के साथ मिट्टी से सांझी माता के मुख्य अंग जैसे मुंह, हाथ, पैर, विभिन्न वस्त्र, पारंपरिक आभूषण और उनके साथ जुड़े अन्य धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतीकों को तैयार किया। प्रशिक्षक मीनाक्षी ने महिलाओं को मिट्टी तैयार करने, उसे सही आकार देने और पारंपरिक डिजाइनों को सटीकता से उकेरने का व्यावहारिक ज्ञान दिया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कुरुक्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्रों की लगभग 15 महिलाओं तथा छात्राओं ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ उन्हें न केवल अपनी कला को निखारने का मंच मिला है, बल्कि अपनी प्राचीन परंपराओं को करीब से जानने का भी अवसर प्राप्त हुआ है। कार्यशाला के अंतिम दिन रविवार को महिलाओं द्वारा तैयार की गई सुंदर कलाकृतियों और सांझी के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति के साथ इस आयोजन का समापन किया जाएगा। इस मौके पर ललित कला समन्वयक सीमा काम्बोज, विकास शर्मा, पवन कुमार उपस्थित रहे।


