
पेपर लीक विवाद: छात्रों को ‘दहशतगर्द’ बताने पर भड़के किसान संगठन, धर्मेंद्र प्रधान से मांगा इस्तीफा
नई दिल्ली / लखनऊ, 25 जून 2026
नीट (NEET) समेत देश की तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर दिए गए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक कथित बयान पर बवाल मच गया है। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। किसान संगठनों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री ने प्रदर्शनकारी छात्रों और नौजवानों को ‘दहशतगर्द’ (आतंकवादी) करार दिया है।
”नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय छात्रों पर लगा रहे अनर्गल आरोप”
सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा:
”केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का यह कहना कि प्रदर्शनकारी छात्र समाज में नफरत, हिंसा और भय का वातावरण बना रहे हैं, सरासर गलत है। हकीकत यह है कि हजारों छात्र पेपर लीक के खिलाफ और जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय नौजवानों पर ऐसे गंभीर आरोप लगाना शिक्षा मंत्री के मानसिक दिवालियापन का सबूत है।”
सैकड़ों परीक्षाओं के पेपर लीक, छात्र आत्महत्या को मजबूर
किसान नेताओं ने कहा कि नीट से लेकर लेखपाल, जेई, पुलिस और सीयूईटी (CUET) जैसी सैकड़ों प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। सरकार अपनी कमियों को सुधारने के बजाय छात्रों पर ही निशाना साध रही है।
बयान में आगे कहा गया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों के मन में असली दहशत पैदा की है। इसी मानसिक तनाव और दहशत के कारण नीट परीक्षा देने वाले करीब 17 बच्चे आत्महत्या जैसा भयावह कदम उठाने को मजबूर हो गए, जबकि हजारों छात्र एंजायटी, भय, कुंठा और निराशा के शिकार हैं। संगठनों ने इसके लिए सीधे तौर पर धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया है।
किसान आंदोलन की दिलाई याद, मांगी माफी की मांग
किसान यूनियनों ने सरकार के रवैये की तुलना पिछले किसान आंदोलन से करते हुए कहा कि जब दिल्ली की सड़कों पर किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तब भी सत्ता में बैठे लोगों ने उन पर इसी तरह के अनर्गल आरोप लगाए थे। उन्होंने मांग की है कि धर्मेंद्र प्रधान को अपने इस अमर्यादित बयान के लिए देश के छात्रों और नौजवानों से तुरंत माफी मांगनी चाहिए।
संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे गंभीर मसलों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि देश के बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।


