
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मेडिकल जांच में खानापूर्ति का आरोप
आजमगढ़। जिले के तरवां थाना क्षेत्र अंतर्गत पट्टीभिखारी गांव से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक अकेली महिला को बाजरे के खेत में एक ही परिवार के चार लोगों द्वारा लाठी-डंडों, लात-घूसों से बेरहमी से पीटा जा रहा है। इस पूरी वारदात के दौरान वीडियो के पीछे खड़ी एक दो साल की मासूम बच्ची बिलख-बिलख कर रोती नजर आ रही है। मामले में घायल पीड़िता पूनम देवी की तहरीर पर स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 जुलाई घटना के दिन एक ही परिवार के चार नामजद आरोपियों सरिता, बबीता, बृजेश यादव और मां चनरमाके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि, पीड़िता ने पुलिस की इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूनम देवी का आरोप है कि आरोपियों के रसूख और प्रभाव में आकर थानाध्यक्ष ने बेहद हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और आरोपियों को आसानी से छोड़ दिया। पीड़िता के मुताबिक, घटना से वक़्त वह खेत में धान की सोहाई कर रही थी। उसी दौरान आरोपी पाटीदार बृजेश यादव उसे अकेला पाकर जबरन बाजरे के खेत के अंदर खींचने का प्रयास किया। जब पीड़िता ने खुद को बचाने के लिए चीखना-चिल्लाना शुरू किया, तो आरोपी के परिवार के अन्य तीनों सदस्य भी मौके पर पहुंच गए और सभी ने मिलकर लाठी-डंडों से उस पर जानलेवा हमला कर दिया। पीड़िता का कहना है कि इस मारपीट में उसे शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने उसे तुरंत इलाज मुहैया कराने के बजाय दो दिनों तक इधर-उधर घुमाया। इसके बाद, तीसरे दिन शनिवार को उसे मेडिकल परीक्षण के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। पीड़िता ने डॉक्टरों पर भी लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पूरे शरीर का ठीक से मेडिकल करने के बजाय सिर्फ एक हाथ के पंजे का आधा-अधूरा मेडिकल करके खानापूर्ति कर दी गई। अस्पताल पहुंची पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और यह उसके साथ पांचवीं वारदात है। दो साल पहले भी उसके मासूम बेटे को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में उसे पुलिस अधीक्षक से मिलने जाने से भी रोका जा रहा है। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।


