
आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश):
आजमगढ़ जिले के मेहनगर थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली और भू-माफियाओं के गठजोड़ से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। ‘वैशवारा हिन्दी पत्र’ के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार रमाकान्त पाण्डेय (गोपालपुरी) ने उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल को एक अत्यंत आकस्मिक शिकायत व प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
पत्रकार का आरोप है कि स्थानीय मेहनगर पुलिस ने विपक्षियों से सांठगांठ कर उनके और उनके निर्दोष पुत्र के खिलाफ बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे चोरी का ‘झूठा और फर्जी’ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
रमाकान्त पाण्डेय (निवासी: ग्राम-गोपालपुर, थाना-मेहनगर, आजमगढ़) ने अपनी शिकायत में बताया कि वह लंबे समय से निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज व लोकतंत्र की सेवा कर रहे हैं।
जमीन और मोबाइल टावर का विवाद: पत्रकार का आरोप है कि विपक्षी राकेश यादव (सुपरवाइजर) और अभिषेक मिश्रा द्वारा उनकी निजी भूमि पर लगे मोबाइल टावर को लेकर लगातार अवैध विवाद खड़ा किया जा रहा था। इस संबंध में उन्होंने स्थानीय पुलिस व अपर पुलिस अधीक्षक को 1 जुलाई 2026 को लिखित शिकायत भी दी थी।
पुलिस की एकतरफा कार्रवाई: आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने इस शिकायत पर ध्यान देने के बजाय, विपक्षियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत 4 जुलाई 2026 को पत्रकार और उनके बेटे के खिलाफ सीधे चोरी का फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया।
घर छोड़ने पर हुए मजबूर: पीड़ित पत्रकार का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस द्वारा उनके घर पर लगातार दमनकारी और अवैध दबिश दी जा रही है। पुलिसिया खौफ और मानसिक उत्पीड़न के कारण वह अपना घर छोड़कर बाहर ‘वनवास’ काटने को मजबूर हैं और उनका पूरा परिवार अत्यंत भयभीत व असुरक्षित है।
राज्यपाल से की गई मुख्य मांगें
पीड़ित पत्रकार ने महामहिम राज्यपाल से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध करते हुए निम्नलिखित मांगें की हैं:
निष्पक्ष जांच: मेहनगर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए चोरी के इस मुकदमे की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच लंबित रहने तक पुलिस की एकतरफा कार्रवाई व दबिश पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: बिना किसी प्राथमिक जांच के सीधे मुकदमा दर्ज करने वाले और अपराधियों को संरक्षण देने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
विपक्षियों पर मुकदमा: पत्रकार को फोन पर फर्जी मुकदमे में फंसाने व बर्बाद करने की धमकी देने वाले विपक्षी राकेश यादव व अभिषेक मिश्रा के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
सुरक्षा की गारंटी: पीड़ित पत्रकार और उनके पूरे परिवार को स्थानीय पुलिस व विपक्षियों के दमनकारी आतंक से मुक्त कराते हुए पर्याप्त सुरक्षा एवं जान-माल की गारंटी प्रदान की जाए।
इस पत्र के साथ पीड़ित पत्रकार ने 28 जून से 3 जुलाई 2026 के बीच स्थानीय पुलिस और पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को दिए गए शिकायती पत्रों की प्रतियां भी साक्ष्य के रूप में संलग्न की हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।


