
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल का उपमुख्यमंत्री पर तीखा हमला: मदरसों पर दिए गए बयान को बताया ‘घटिया मानसिकता’
विशेष संवाददाता:
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने एक उपमुख्यमंत्री द्वारा मदरसों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। कौंसिल ने इसे संवैधानिक पद पर रहते हुए एक ‘घटिया मानसिकता’ का बयान करार दिया है और उपमुख्यमंत्री से मुस्लिम समाज से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
मदरसों के ऐतिहासिक योगदान को किया याद
कौंसिल ने अपने बयान में देश की आजादी में मदरसों और वहां के लोगों के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसे हमेशा देश की सलामती और एकता के लिए आगे रहे हैं।
आजादी की लड़ाई: अंग्रेजों के खिलाफ जंग-ए-आजादी का बिगुल मदरसों से ही बजा था।
प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी: मदरसों से ही डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अशफाकुल्ला खान, मौलाना जौहर, हसरत मोहानी जैसे देश के कई महान स्वतंत्रता सेनानी निकले।
बलिदान: जंगे-आजादी की तहरीक में मदरसे से जुड़े लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ न सिर्फ लंबी जेल काटी, बल्कि खुशी-खुशी फांसी के फंदे को भी गले लगाया।
’समाज को बांटने और असफलताओं को छिपाने की राजनीति’
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज को तोड़ने का काम करते हैं। कौंसिल का आरोप है कि सरकार के पास जनता को देने के लिए कोई वास्तविक विकास कार्य या विजन नहीं है, इसलिए वह केवल मस्जिद-मंदिर और हिंदू-मुसलमान के मुद्दों पर अपनी राजनीति चला रही है।
कौंसिल की मुख्य मांग:
“उपमुख्यमंत्री महोदय को कुछ दिन मदरसे में जाकर पढ़ाई करनी चाहिए या अपनी ऐतिहासिक जानकारी को बढ़ाना चाहिए। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करती है और मांग करती है कि उपमुख्यमंत्री महोदय तत्काल मुस्लिम समाज से माफी मांगें।”


