
बिना बुलाये जाओ तो अपमान मिलता है : स्वामी पर्णव पुरी महाराज
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 7 अगस्त : श्री स्थानेश्वर महादेव मंदिर प्रागंण में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन में कथा व्यास स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज द्वारा महाभारत के विशेष प्रसंगों के द्वारा संगीतमय कथा से भक्तों को आनंदित किया। और अपने प्रवचन में बताया की माता सती जब भगवान शंकर से अपने पिताजी दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जाने को पूछती है तो भोले नाथ कहते हैं देवी
जहां विरोध हो वहां कभी नहीं जाना चाहिए, अपने स्वजन यदि विरोधी बन जाए तो उनका व्यवहार अधिक कष्ट देता है।
ऐसे में उनसे भेंट करने से बचना चाहिए।
क्योंकि शस्त्र का घाव तो कुछ समय बाद भर ज्यादा है, किंतु कटु वचनों से मिला घाव कभी नहीं भरता।
माता सती भगवान की बात न मानकर अपने पिताजी के यज्ञ में जाती हैं।
और वहां शिव जी का भाग न होने के कारण क्रोध में सबको फटकार कर योग अग्नि में अपने शरीर का त्याग कर देती है।
वही माता सती हिमालय के घर पुनः माता पार्वती के रूप में जन्म लेती हैं और शंकर जी से उनका विवाह होता है।
स्वामी जी ने ध्रुव की कथा से बताया कि समाज उगते हुए सूर्य को नमस्कार करता है।
जब ध्रुव जी को उनकी माता सुरुचि ने धक्का देकर भरी सभा से निकाल दिया था,तब कोई उनके पक्ष में नहीं बोला पाया।
वही ध्रुव भगवत प्राप्ति करके जब लौटने लगे तो सारी प्रजा ,सेना के साथ माता सुरुचि भी राजा उत्तनपाद के संग ध्रुव जी का स्वागत करने पहुंची।
ईस प्रसंग द्वारा ये संदेश दिया कि हमारे आपके कर्मों पर प्रति क्षण इस ब्रह्माण्ड की नज़र है और सारी जानकारी प्रभु को मिलती है साथ ही हरि
नाम महिमा का वर्णन किया गया।
इस शुभवसर पर श्रीमहंत बंसी पूरी जी, म.लक्ष्मी नारायण पूरी, म. जगन्नाथ पुरी, सुनील सचदेवा,रमेश सचदेवा, रिपुदमन कालरा परिवार, प्रधान सतीश शर्मा एवं सदस्य, महिला मानस प्रचार मंडल सदस्यगण एवं सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


