
थानेसर, संजीव कुमारी 6 सितंबर : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पीठाधीश व हार्मनी ऑकल्ट वास्तु जोन पिपली (कुरूक्षेत्र) के अध्यक्ष ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आज वास्तु के क्षेत्र में जियोपैथिक स्ट्रेस की चर्चा तेजी से बढ़ रही है। जियो-वास्तु के अनुसार पृथ्वी के कुछ क्षेत्रों में भूमिगत जलधाराओं,भूगर्भीय संरचनाओं अथवा
प्राकृतिक भू-ऊर्जात्मक परिस्थितियों के कारण वातावरण असंतुलित माना जाता है। ऐसे स्थानों पर लंबे समय तक रहना या काम करना कुछ लोगों के लिए असहज अनुभव का कारण माना जाता है।
डॉ. सुरेश मिश्रा, वास्तु एक्सपर्ट के अनुसार, “भवन का वास्तु केवल दिशाओं और कमरों की स्थिति से निर्धारित नहीं होता। जिस भूमि पर भवन बना है, उसका अध्ययन भी महत्वपूर्ण है।”
घर में कथित जियोपैथिक स्ट्रेस वाले स्थान पर बेड होने से नींद में परेशानी, बेचैनी, थकान या एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं महसूस होने की बात वास्तु विशेषज्ञों द्वारा कही जाती है।
इसी प्रकार फैक्ट्री और ऑफिस में कर्मचारियों के कार्यस्थल, मशीन ऑपरेटर की जगह, मैनेजमेंट के केबिन तथा लंबे समय तक उपयोग होने वाले स्थानों का भी प्राचीन वास्तु शास्त्र और आधुनिक वैज्ञानिक वास्तु दृष्टि से परीक्षण किया जाता है।
व्यवसाय में बेहतर वातावरण, कर्मचारियों की सहजता और कार्यक्षमता के लिए स्थान का संतुलित होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
वास्तु शास्त्र और आधुनिक वैज्ञानिक वास्तु का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि स्थान, व्यक्ति और वातावरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है।


