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राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,94,393 वाद हुए निस्तारित

लोकेशन रायबरेली
रिपोर्टर विपिन राजपूत
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,94,393 वाद हुए निस्तारित*
रायबरेली:- 14 मार्च 2026
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद न्यायालय रायबरेली में मा० जनपद न्यायाधीश अमित पाल सिंह की अध्यक्षता में तथा मुख्य अतिथि मा० प्रशासनिक न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। जिसमें कुल 1,94,393 वाद निस्तारित किये गये।
इस कार्यक्रम का उद्धाटन मा० न्यायमूर्ति द्वारा दीप प्रज्जवलन व देवी सरस्वती के चित्र पर पुष्प चढ़ा करके किया गया। मा० न्यायमूर्ति द्वारा उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए बताया गया कि न्याय व्यवस्था में वादकारियों का हित सर्वोच्च होता है। वादकारियों के मध्य सुलह-समझौते के आधार पर लम्बित मामलों को निपटाने व आमजन को सुलभ व सुगम न्याय उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है।
इस अवसर पर जिला जज अमित पाल सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय भूपेन्द्र राय, चेयरमैन-मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण प्रफुल्ल कमल, अपर प्रधान न्यायाधीश चन्द्रमणि मिश्रा, विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 अनिल कुमार-पंचम, प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश कुशल पाल, अपर जिला जज अमित कुमार पाण्डेय (नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत), मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार सिंह व अन्य न्यायिक अधिकारीगण व विभिन्न बैंक के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अमोद कंठ ने बताया की राष्ट्रीय लोक अदालत में एक लाख चौरन्नबे हजार तीन सौ तिरनब्बे मुकदमे निपटाये गये, तथा कुल समझौते की धनराशि पन्द्रह करोड़ से अधिक की रही। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंको व फाइनेन्स कम्पनियों के प्री-लिटिगेशन स्तर पर मामले निस्तारित कराये गये तथा मौके पर ही समझौते कराये गये। इस लोक अदालत में अन्य मामलों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ई-चालान के मामले, चेक बाउंस (एन0आई0एक्ट) के मामले तथा वैवाहिक विवाद के मामले निस्तारित किये गये। तलाक के मुहाने पर खड़े कई जोड़ों का सुलह-समझौता कराकर वापस भेजा गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला कारागार रायबरेली में बंदियों द्वारा बनाई गई सामग्री की प्रदर्शनी दीवानी न्यायालय में प्रदर्शित की गयी साथ ही साथ एक जिला एक उत्पाद की प्रदर्शनी उद्योग विभाग द्वारा लगायी गयी। आमजन की सहायता के लिए न्यायालय परिसर में कई जगह सहायता पटल व हेल्प डेस्क बनाये गये।



