गीता ही राधा का स्वरूप हैं : पद्मश्री बाबा बलिआ जी महाराज



ओडिशा से कुरुक्षेत्र आकर हर वर्ष राधाष्टमी पर्व मनाने आते है बाबा बलिया जी महाराज।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 1 सितंबर : धर्मनगरी कुरुक्षेत्र सारस्वत ब्राह्मण धर्मशाला में पद्मश्री बाबा बलिआ जी महाराज ओडिशा द्वारा राधाष्टमी पर्व महाराज के मार्गदर्शन में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। समाजसेवा तथा समाज सुधार क्षेत्र पर अपना स्वतन्त्र पहचान बनाने वाला सुप्रसिद्ध सन्त बाबा बलिआ जी महाराज ने राधाष्टमी तिथि पर आयोजित 32 वाॅ राधाष्टमी महोत्सव में सम्बोधित करते हुए बोले कि, भगवान श्रीकृष्ण को मुखारविन्द से निष्पन्न भगवत गीता पुरे विश्व मानव जीवन का धरोहर है। राधा राणी आराधना का प्रतीक है। राधा शब्द विपरित होने से धारा’ होती है अर्थात् नियम। गीता वही धारा था अनुशासन का प्रतीक है। इस हेतु गीता ही प्रत्यक्ष राधा का स्वरूप है।
इस अवसर पर बलिआ महाराज जी के कृपापात्र शिष्य डा. स्वामी चिदानन्द जी ने बताया कि कुरुक्षेत्र धर्मनगरी के साथ साथ प्रमुख तपोभूमी भी है। जहाँ पर भगवान् श्रीकृष्ण जी के साथ सूर्यग्रहण की अवसर पर ब्रह्मसरोवर तट में नन्द बाबा, यशोदा माॅ तथा सभी गोपी गोपालों का साथ अन्तिम बार मुलाकात हुआ था। गीता पुरे विश्व का माननीय संविधान है।
बाबा बलिआ जी महाराज के द्वारा आयोजित 32 वाँ वार्षिक राधाष्टमी महोत्सव पर स्वामी चिदानन्द जी ने ज्योतिसर पर ‘सनातन धर्म ध्वजा’ का ध्वजारोहण किया। साथ साथ ब्रह्मसरोवर तट पूर सम्पूर्ण गीता हवन, पारायण, सन्त सेवा, नारायण सेवा और प्रसाद सेवन आदि कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में षडदर्शन साधुसमाज के संगठन सचिव वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक, पर्यावरण संरक्षिका डॉ. संजीव कुमारी, सानवी, ज्ञान शर्मा, विवेक शर्मा, विविध शर्मा, ब्रह्मानन्द बेहेरा, अरुण मलिक, चिन्मय महापात्र, समीर लेङ्का, पण्डित अजय मिश्रा व साथ ओडिशा शिशुअनन्त आश्रम का सभी भक्तसमाज ने कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग किया।




