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लुवास में रेबीज निदान हेतु पशु चिकित्सकों का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न

हिसार, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 29 मार्च : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के पशु जन स्वास्थ्य और महामारी विज्ञान विभाग में हरियाणा राज्य के पशु चिकित्सकों हेतु रेबीज निदान विषय पर एक महत्वपूर्ण हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा के महानिदेशक डॉ. प्रेम सिंह तथा संयुक्त निदेशक डॉ. सुखदेव राठी का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘वन हेल्थ’ अवधारणा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जूनोटिक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पशु जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश खुराना ने बताया कि यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों के ज्ञान एवं कौशल को बढ़ाकर इस घातक रोग के प्रभावी नियंत्रण में सहायक सिद्ध होगा।
प्रशिक्षण का संचालन विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय जे. जाधव तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. मनेश कुमार द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. श्रीकृष्ण इस्लूर, निदेशक, विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) रेबीज रेफरेंस लेबोरेटरी, पशु चिकित्सा महाविद्यालय, बेंगलुरु ने प्रतिभागियों को कुत्तों में रेबीज निदान हेतु ब्रेन सैंपलिंग एवं आधुनिक नैदानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण सत्र में रेबीज रोग से संबंधित सैद्धांतिक व्याख्यानों के साथ-साथ विभिन्न डायग्नोस्टिक परीक्षणों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके पश्चात प्रतिभागियों को कुत्तों एवं अन्य पशु प्रजातियों से ब्रेन सैंपलिंग, लैटरल फ्लो असे, डायरेक्ट फ्लोरेसेंट एंटीबॉडी परीक्षण तथा उनके परिणामों की वैज्ञानिक व्याख्या का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा के कुल 10 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की सफलता में पशु जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इनमें पशु रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विकास नेहरा, वैज्ञानिक डॉ. बाबूलाल जांगिड़, पशु शरीर रचना विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण गहलोत, टी.वी.सी.सी. प्रमुख डॉ. ज्ञान सिंह तथा वैज्ञानिक डॉ. मनीष शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
प्रशिक्षण के सफल आयोजन में श्री प्रेम नैन, सुखवीर, राममेहर, विकास तथा राम कुमार का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण राज्य में रेबीज की त्वरित पहचान, प्रभावी निगरानी तथा जनस्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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