

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के आह्वान पर बुधवार को जनपद आजमगढ़ के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान कर्मचारियों ने शासन से लंबित मांगों पर शीघ्र शासनादेश जारी किए जाने की मांग की।
संघ की ओर से मुख्यमंत्री और जिला विद्यालय निरीक्षक को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा गया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर पूर्व में शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ कई बार वार्ता हो चुकी है तथा मांगों पर कार्यवाही का आश्वासन भी मिला, लेकिन अभी तक अपेक्षित शासनादेश जारी नहीं किए गए हैं।
धरने के दौरान जिला अध्यक्ष इंद्रासन सिंह ने अर्हताधारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति का प्रावधान, सेवानिवृत्ति पर राजकीय कर्मचारियों की तरह 300 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग प्रमुखता से उठाई।
संघ ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विद्यालय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बावजूद इसके उन्हें कई सुविधाओं से वंचित रखा गया है। कर्मचारियों ने मांग की कि शिक्षकों की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी विद्यालय प्रबंध समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाए तथा राष्ट्रपति और राज्य पुरस्कारों में उनके लिए भी प्रावधान किया जाए।
इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी से लिपिक पद पर पदोन्नति के लिए अनिवार्य किए गए CCC प्रमाणपत्र की शर्त समाप्त करने, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों के लिपिकों की वेतन विसंगति दूर करने, रोके गए विभिन्न भत्तों को बहाल करने तथा वर्ष 2014 के बाद नियुक्त शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सामूहिक बीमा कटौती किए जाने की मांग की गई।
कर्मचारियों ने 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की भी मांग उठाई। साथ ही चतुर्थ श्रेणी से कनिष्ठ सहायक तथा कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नति होने पर पूर्व की तरह एक वेतन वृद्धि का लाभ दिए जाने की मांग की गई।
संघ ने लंबे समय से लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित नियुक्तियां नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। मांग की गई कि नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए। आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को विभाग द्वारा देय वेतन सीधे कोषागार के माध्यम से उनके खातों में भेजने तथा उनकी सेवा सुरक्षा के लिए नियमावली बनाए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर विशेष जोर
ज्ञापन में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने पर विशेष जोर दिया गया। संघ के अनुसार 5 सितंबर 2025 को सरकार की ओर से विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा की घोषणा की गई थी। बाद में 4 फरवरी 2026 को जारी शासनादेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इस सुविधा से बाहर रखे जाने पर संघ ने नाराजगी जताई।
कर्मचारियों ने कहा कि जब वे विद्यालयों में शिक्षकों के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं तो चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा में भी उनके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
धरने के माध्यम से कर्मचारियों ने शासन से सभी लंबित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए शासनादेश जारी करने की मांग की। संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।


