
पेपर लीक मामला: जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के समर्थन में उतरा किसान यूनियन; शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग
आजमगढ़, 03 जुलाई 2026
देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को अब किसानों का भी पुरजोर समर्थन मिल गया है। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रतियोगी छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जिद छोड़कर छात्रों से वार्ता नहीं की, तो किसान अपने बच्चों के हक के लिए खुद मैदान में उतरने को मजबूर होंगे।
”किसान भूख से मर रहा, बच्चे हड़ताल को मजबूर”
सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेन्द्र यादव ने एक संयुक्त बयान में कहा:
”देश का किसान पहले से ही बदहाली और भूख से मर रहा है, और अब उसके बच्चे अपनी जायज मांगों के लिए भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं। नीट (NEET) के पेपर लीक होने के बाद देश के कई मासूम छात्रों को आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाना पड़ा। छात्रों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
पेपर लीक पर चुप क्यों हैं प्रधानमंत्री?
किसान नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश भर में सिर्फ नीट ही नहीं, बल्कि पुलिस भर्ती, लेखपाल भर्ती, आरओ (RO) और एआरओ (ARO) समेत सैकड़ों प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। इसके बावजूद सरकारों ने न तो कोई ठोस योजना बनाई और न ही दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई की।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा:
परीक्षा पर चर्चा तो पेपर लीक पर चुप्पी क्यों?: जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘परीक्षा पर चर्चा’ करते हैं, उसी तरह उन्हें देश में हो रहे ‘पेपर लीक’ पर भी चर्चा करनी चाहिए।
इस्तीफे की मांग: छात्र लंबे समय से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यदि वे खुद इस्तीफा नहीं देते, तो प्रधानमंत्री को उन्हें तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए।
आंदोलन को बदनाम करने की साजिश: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को देश विरोधी करार देने के लिए शिक्षा मंत्री और केंद्र सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। प्रधानमंत्री अपने सहयोगियों की नाकामी छुपाने के लिए इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं।
लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय
प्रेस नोट के अंत में नेताओं ने कहा कि किसान और छात्र दोनों ही देश के निर्माण की रीढ़ हैं। आज किसानों की तरह देश के नौजवानों और छात्रों को भी अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो कि हमारे लोकतंत्र के लिए बेहद चिंता का विषय है। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा इस संघर्ष में पूरी तरह छात्रों के साथ है और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।

