शारदीय नवरात्र भारत की वैदिक सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है : डा. श्रीप्रकाश मिश्र

शारदीय नवरात्रि के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति में शक्ति उपासना का महत्व विषय पर शक्ति संवाद कार्यक्रम मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में संपन्न।

कुरुक्षेत्र, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक 30 सितम्बर : भारत भूमि को विश्व में उस संस्कृति के लिए जाना जाता है, जिसमें प्रकृति, शक्ति और तन मन का संतुलन सर्वोच्च स्थान पर है। इस परंपरा के केंद्र में देवी शक्ति के विविध रूपों की पूजा और साधना का विशेष महत्व रहा है। इन्हीं महान पर्वों में से शारदीय नवरात्र एक है जो आश्विन मास में प्रतिपदा तिथि से आरंभ होकर नौ दिनों तक चलता है और विजयादशमी को संपन्न होता है। यह विचार शारदीय नवरात्रि के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति में शक्ति उपासना का महत्व विषय पर आयोजित शक्ति संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ दुर्गा की स्तुति से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थिओ ने शिव एवं शक्ति की स्तुति का सस्वर गायन किया।
शक्ति संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा वैदिक सनातन संस्कृति में शक्ति उपासना का बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि यह दिव्य मातृशक्ति की ऊर्जा की उपासना है जो ब्रह्मांड की सृजन शक्ति है। यह उपासना साधकों को शक्ति, साहस, समृद्धि और शांति प्रदान करती है, जिससे आंतरिक और बाह्य जीवन में सुधार होता है। वैदिक सनातन संस्कृति में शारदीय नवरात्र केवल आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित करने का अवसर भी है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ऋतु परिवर्तन के समय उपवास और सात्विक आहार शरीर को स्वास्थ्य देता है।शारदीय नवरात्रि में साधना और उपासना का यह क्रम मनुष्य को भीतर से मजबूत करता है और जीवन की कठिनाइयों से जूझने का साहस देता है। शारदीय नवरात्र भारत की वैदिक सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व व्यक्ति को आत्मसंयम, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश देता है।
कार्यक्रम की अतिविशिष्ट अतिथि समाजसेविका श्रीमती मोनिका आर्य ने कहा आध्यात्मिक दृष्टि यह शारदीय नवरात्रि का यह पर्व आत्म शुद्धि और ईश्वर से एकात्म होने का उत्तम समय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती मीना शर्मा ने कहा शारदीय नवरात्रि का पर्व नारी शक्ति का सम्मान जो जो सृष्टि के निर्माण और पोषण में स्त्री ऊर्जा की भूमिका को स्वीकार करती है। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि मोना ने कहा नवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान का काल नहीं, बल्कि साधना, संयम और आत्म शुद्धि का उत्सव माना जाता है।कार्यक्रम के संयोजक विजय सैनी ने कार्यक्रम का संचालन किया। आभार ज्ञापन सौरव मोदगिल एवं विकास ने संयुक्त रूप से किया। शक्ति संवाद कार्यक्रम में सभी अतिथियों को अंगवस्त्र माँ स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, विद्यार्थी सहित अनेक सामाजिक संस्थाओ के प्रतिनिधि एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ।

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