भगवान श्रीकृष्ण का अभिन्न अंग है सम्पूर्ण ब्रज मण्डल : आचार्य अम्बरीष कृष्ण महाराज

सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 9416191877
ब्यूरो चीफ -डॉ. गोपाल चतुर्वेदी।
वृन्दावन, 29 मार्च : राम नगर कॉलोनी/परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीकृष्ण सेवा धाम में श्रीराधा किशोरी निकुंज सेवा प्रकल्प ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य आचार्य अम्बरीष कृष्ण महाराज के पावन सानिध्य में वृहद सन्त-विद्वत सम्मेलन अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को ब्रज भूमि की महिमा बताते हुए आचार्य अम्बरीष कृष्ण महाराज ने कहा कि ब्रजभूमि का प्राकट्य गोलोक धाम में श्रीराधा रानी की इच्छा से स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के हृदय से हुआ था। इसलिए ये कोई साधारण भूमि नही है,अपितु भगवान श्रीकृष्ण का ही अभिन्न अंग है।
सन्त प्रवर रामदास महाराज एवं पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि ब्रज मंडल चौरासी कोस की परिक्रमा सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने अपने माता यशोदा और पिता नंदबाबा को कराई थी।जिससे उन्हें समस्त धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों के दर्शनों के फल की प्राप्ति हुई थी।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं ब्रजभूमि कल्याण परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष पण्डित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि ब्रज भूमि में समस्त तीर्थ स्थल सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।यहां के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण का वास हैं।इसीलिए इसकी परिक्रमा करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
श्रीरंगलक्ष्मी संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. राम सुदर्शन मिश्र एवं आचार्य सुमंत कृष्ण शास्त्री ने कहा कि ब्रज चौरासी कोस भगवान श्रीकृष्ण और उनकी आल्हादिनी शक्ति स्वरूपा श्रीराधा रानी की पावन लीला भूमि है। इसकी परिक्रमा करने से समस्त पापों का नाश होता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रख्यात भजन गायक पण्डित बनवारी महाराज एवं पण्डित श्याम सुन्दर ब्रजवासी ने ब्रज चौरासी कोस की महिमा से ओत-प्रोत भजनों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया।
महोत्सव में श्रीनिवासाचार्य महाराज, आचार्य हरिप्रसाद द्विवेदी, डॉ. रामदत्त मिश्र, सन्त मदन बिहारी दास महाराज, आचार्य अनमोल कृष्ण शास्त्री, डॉ. जगदीश प्रसाद शर्मा, स्वामी अनंताचार्य महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा, प्रमोद जालान, आचार्य राजेश शास्त्री, डॉ. मृदुला तिवारी, आरती आहूजा आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।संचालन डॉ. राम सुदर्शन मिश्र ने किया।
महोत्सव में पधारे सभी संतों-विद्वानों एवं धर्माचार्यों का स्वागत- सम्मान आचार्य अंकित मिश्रा के द्वारा स्मृति चिन्ह व ठाकुरजी का पटुका-प्रसादी-माला आदि भेंट करके किया गया।
इससे पूर्व समस्त भक्तों- श्रद्धालुओं द्वारा श्रीहरिनाम संकीर्तन करते हुए श्रीधाम वृन्दावन की पंचकोसी परिक्रमा की गई।इसके अलावा बरसाना, गोवर्धन एवं रमणरेती आदि प्रमुख स्थलों के दर्शन किए गए।




