
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
सह संपादक – डॉ. संजीव कुमारी।
कुरुक्षेत्र,17 जून : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के पावन सान्निध्य में 108 साधकों ने अजपा सिद्ध योग किया। साधकों ने अपना सुन्दर और अनुभव का फीडबैक दिया। समर्थगुरू धाम में आचार्यों की टीम के निर्देशन में साधना अच्छी होती है। यहाँ का वातावरण आध्यात्मिक और सुंदर है। अजपा सिद्ध योग कार्यक्रम में स्वस्थ और परमात्मा के सुमिरन की कला सिखलाई जाती है। पुराने संतो की तरह हम आज के परिवेश में 100 वर्ष से ज्यादा हम निरोगी रह सकते है।
मानो मत , अनुभव कीजिए।
समर्थगुरु सहज योग प्राचीन परंपराओं का एक अनूठा संगम है, जिसमें ये कार्यक्रम शामिल हैं :
A. ज्ञान योग (ज्ञानपूर्ण जीवन का मार्ग) – 14 कार्यक्रम।
B. भक्ति योग (भक्तिपूर्ण जीवन का मार्ग) – 14 कार्यक्रम।
C. हठ योग (स्वस्थ जीवन का मार्ग) – 16 कार्यक्रम।
D. कर्म योग (सक्रिय जीवन का मार्ग) – 23 कार्यक्रम।
इन सभी कार्यक्रमों को समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया है और समर्थगुरु धारा द्वारा इन्हें ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से प्रस्तुत किया जाता है।
जून माह के विशेष कार्यक्रम रहेगे।
स्पैशल सम्मोहन प्रज्ञा (22-24 जून)
स्पैशल शब्द योग (22-24 जून)
स्पैशल महाजीवन प्रज्ञा (25-27 जून)
स्पैशल ऊर्जा योग (25-27 जून)
26 जून से 28 जून 2026 में अजपा सिद्ध योग कार्यक्रम होगा।
आज ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया ने विशेष बताया कि नाम के सुमिरन से सुख का सागर हाथ लग जाता है। सुख का धाम, सुख का जो स्रोत है, वह तुम्हारे पास स्वतः ही चलकर आ जाता है। नाम सुमिरन के पीछे सुख आता है। सुख, नाम सुमिरन की छाया है। सुख कब मिलता है, चैन कब मिलता है ? नाम का सुमिरन करते ही महासुख की प्राप्ति होने लगती है।


