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दिव्या ज्योति जागृती संस्थान की ओर से साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का किया गया आयोजन

(पंजाब) फिरोजपुर 26 जनवरी [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभूति के माहौल में किया गया। इस पावन सत्संग में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया और पूर्ण गुरु की कृपा से अपने जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से भर लिया। सत्संग के दौरान सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी हरजीत भारती जी ने “गुरु की चाहत और ईश्वर से मिलने की अटूट चाहत” विषय पर गहरे और दिल को छू लेने वाले आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए और कहा कि जैसे प्यासे व्यक्ति को पानी की जरूरत होती है, वैसे ही आत्मा ईश्वर के दर्शन के लिए तरसती है। यह चाहत पूर्ण गुरु के प्रति भक्ति का रूप लेती है, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर ईश्वर के चरणों से जोड़ देती है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति व्यक्ति के अंदर से अहंकार को पिघला देती है और हृदय में विनम्रता, प्रेम और समर्पण की भावनाएं जगा देती है। जब साधक अपने अंदर गुरु के वियोग को महसूस करता है, तो वह हर पल ईश्वर की याद में डूबा रहता है। साध्वी जी ने बताया कि गुरु की कृपा के बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है और गुरु ही वह दीपक है जो हमारे अंदर के अंधेरे को दूर करके आध्यात्मिक ज्ञान का रास्ता दिखाता है। साध्वी हरजीत भारती जी ने संगत से अपील की कि वे नाम सिमरन, सत्संग और सेवा को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाएं, क्योंकि यही वे साधन हैं जो इंसान को ईश्वर से अटूट रिश्ता बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि जब मन गुरु के चरणों में लग जाता है, तो जीवन के दुख, परेशानियां और उलझनें अपने आप दूर होने लगती हैं। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम को और भी खास बनाते हुए साध्वी बलजीत भारती जी ने बहुत ही खूबसूरती से भावपूर्ण भजन कीर्तन गाया। भजनों की मीठी और दर्द भरी धुनों ने संगत के दिलों को छू लिया और पूरा आश्रम भक्ति रस में डूब गया। कीर्तन के दौरान संगत ने गुरु का गुणगान किया और कई लोगों की आंखें भर आईं। सत्संग के आखिर में संगत ने खुद को आध्यात्मिक शांति, अंदरूनी खुशी और नई चेतना से भरा हुआ महसूस किया। लोगों ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आध्यात्मिक काम की बहुत तारीफ़ की और भविष्य में भी ऐसे सत्संग प्रोग्राम में ज़्यादा से ज़्यादा हिस्सा लेने का फ़ैसला किया।




