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सुब्हानी मियां की सरपरस्ती में दरगाह पर मनाया गया यौमे रज़ा

पवन कालरा संवाददाता राष्ट्रीय सभ्यता

बरेली : दरगाह आला हज़रत पर फ़ाज़िले बरेलवी इमाम अहमद रज़ा खां आला हज़रत का 175 वा यौमे रज़ा(यौमे पैदाइश) दरगाह सरपरस्त हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी(अहसन मियां) की सदारत में सज्जादानशीन के निवास पर मनाया गया। जिसमें बरेली समेत दूर दराज से आए उलेमा,शोहरा समेत अकीदतमंदों ने शिरक़त की। देर रात सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने दरगाह पर गुलपोशी व फातिहाख्वानी की। इसके बाद सभी को दरगाह में रखें तब्बरूकात की ज़ियरत कराई। इससे पहले महफ़िल का आगाज़ तिलावत-ए-कुरान से किया गया। नातख्वा आसिम नूरी व मुर्तजा अज़हरी ने नात और मनकबत का नज़राना पेश किया। मुफ्ती अहसन मियां ने आला हज़रत को खिराज़ पेश करते हुए कहा कि आपकी पैदाइश 1856 ईस्वी 10 शव्वाल 1272 हिजरी को बरेली में हुई। इस्लामिक जगत में ऐसे आलिम की मिसाल मिलना मुश्किल है जो धार्मिक(मज़हबी) ज्ञान के साथ ही अन्य सांसारिक(दुनियावी) ज्ञान का भी माहिर हो। आला हज़रत कुरान और हदीस के असाधारण जानकार ही नहीं बल्कि अनेकों विषयों के ज्ञाता भी थे। आला हज़रत को इल्म का ख़ज़ाना यो ही नहीं कहा जाता बल्कि भारत समेत अरब के उस वक्त के बड़े बड़े उलेमा ने आपको इस्लामी दुनिया में ज्ञान का सागर(इल्म का समुंदर) और सुन्नियत का स्तंभ माना है। दुनिया भर के मुसलमान आज भी आपके इल्म से फैज़ हासिल कर रहे है। आगे कहा कि आला हज़रत ने अपनी पूरी ज़िंदगी में लाखों फ़तवे लिखे। आप कोई भी फतवा लिखने से पहले उसके बारे में पहले शोध करते उसके बाद ही कोई फतवा देते थे। फ़तावा रज़विया से दुनिया भर के मुसलमान आज भी फैज़ हासिल कर रहे है।
दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि आखिर में मुफ्ती ज़ईम रज़ा व मौलाना जाहिद रज़ा ने फातिहा पढ़ी। खुसूसी दुआ मुफ्ती अहसन मियां ने की। इसके बाद लंगर का एहतिमाम किया गया। इस मौके पर मौलाना अबरार उल हक़,मौलाना बशीरूल क़ादरी टीटीएस के परवेज नूरी,औरंगज़ेब नूरी,अजमल नूरी,शाहिद नूरी,मंजूर रज़ा,मुजाहिद रज़ा,नईम नूरी,साजिद नूरी,डॉक्टर अब्दुल माजिद,नाजिम रज़ा,इरशाद रज़ा,युनुस गद्दी,इशरत नूरी,आलेनबी,काशिफ सुब्हानी,सबलू अल्वी,जोहिब रज़ा,सय्यद एजाज़,सय्यद माजिद,आरिफ नूरी,मुस्तकीम रज़ा आदि लोग शामिल रहे।

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