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तीज त्यौहार स्वयं से साक्षात्कार का पर्व है।

🌸 तीज त्यौहार स्वयं से साक्षात्कार का पर्व है। 🌸

(पंजाब) फिरोजपुर 25 अगस्त [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फिरोजपुर में तीज का पर्व बहुत ही हर्षा उल्लास के साथ भारतीय संस्कृति के अनुसार मनाया गया। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के परम शिष्य साध्वी करमाली भारती जी ने कहा के तीज का पर्व केवल परंपरा और उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आत्मिक साधना और स्वयं से साक्षात्कार का अवसर है। सावन की हरियाली, झूले और गीत-संगीत के बीच यह पर्व हमें भीतर की गहराई तक उतरने का निमंत्रण देता है।

साध्वी अनु भारती जी एवं साध्वी प्रीति भारती के ने तीज का अध्यात्म महत्व समझाते हुए कहा के माँ पार्वती ने कठोर तप करके भगवान शिव को प्राप्त किया था। यह तप वास्तव में बाहरी संसार से हटकर भीतर की यात्रा थी – आत्मा के धैर्य, शक्ति और विश्वास की परीक्षा। तीज का व्रत उसी आत्मिक अनुशासन की स्मृति है।
उन्होंने कहा के व्रत हमें केवल शरीर की भूख-प्यास से आगे बढ़ाकर आत्मा की तृष्णा को समझने की शिक्षा देता है।उपवास मन को शांत कर भीतर की चेतना से जुड़ने का साधन है।
साध्वी दीपिका भारती जी ने कहा के साक्षात्कार यह अनुभव कराना है कि परमात्मा बाहर नहीं, हमारे भीतर ही स्थित है। सावन की हरियाली और झूले जीवन में आनंद और आत्मा की ताजगी का प्रतीक हैं।
साध्वी जी ने बताया कि तीज हमें यह बताती है कि जीवन का असली सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि स्वयं की आत्मा के साथ एकाकार होने में है। जिस प्रकार माँ पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया, उसी प्रकार हर साधक तीज से प्रेरणा लेकर अपने भीतर के ईश्वर से मिलन कर सकता है।
तीज केवल दांपत्य सुख की प्रार्थना नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की साधना है।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक नृत्य, गीत, गिद्दा, बोलियां, की प्रस्तुति मंच के माध्यम से सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के दीक्षित बच्चियों के द्वारा पेश की गई।
स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए पूर्ण संत के माध्यम से ब्रह्म ज्ञान की आवश्यकता होती है। तब ही जीवन में तीज के महत्व को समझा जा सकता है। तीज कार्यक्रम के दौरान नारी को अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करने व पहचानने के लिए प्रेरित किया गया।
सभी नारियां भारतीय पोशाकों में सज कर कार्यक्रम में शामिल हुई। सभी ने नाच कर तीज का त्यौहार मनाया। इस दौरान भारतीय संस्कृति को उजागर करती झाकियां भी सजाई गई थी।

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