
भुवनेश्वर में गूंजा मुबारकपुर सिल्क का गौरव, अंतरराष्ट्रीय विरासत प्रदर्शनी ने रचा नया इतिहास
भुवनेश्वर, ओडिशा |
मुबारकपुर (आजमगढ़) की विश्वप्रसिद्ध हथकरघा परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित “अंतरराष्ट्रीय मुबारकपुर सिल्क विरासत प्रदर्शनी 2026” का सफल आयोजन भुवनेश्वर, ओडिशा में संपन्न हुआ। यह प्रदर्शनी केवल वस्त्रों का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि बुनकर परिवारों की पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, संस्कृति और आत्मनिर्भरता की कहानी को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त प्रयास थी।
तीन दिवसीय प्रदर्शनी में 25,000 से अधिक आगंतुकों ने सहभागिता की, जबकि 6 देशों तक इसकी पहुंच बनी। इस दौरान 120 से अधिक व्यावसायिक एवं सहयोगात्मक संवाद, 75 से अधिक बुटीक एवं रिटेलर संपर्क तथा 200 से अधिक नए व्यावसायिक नेटवर्क संबंध स्थापित हुए।
प्रदर्शनी में मशरू सिल्क, मूगा सिल्क, मलबेरी सिल्क, पारंपरिक हथकरघा उत्पाद, डिज़ाइनर कलेक्शन तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से 150 से अधिक बुनकर परिवारों का प्रतिनिधित्व हुआ, जबकि बुनकर परिवारों के युवा सदस्यों को बाजार, संचार, डिजिटल मार्केटिंग और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी प्रदर्शनी को व्यापक समर्थन मिला, जहां इसकी पहुंच 12 लाख से अधिक लोगों तक दर्ज की गई। इस आयोजन ने मुबारकपुर सिल्क को एक प्रीमियम विरासत ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शनी का अगला पड़ाव मुंबई होगा, जहां एक विशेष निजी प्रदर्शनी के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित खरीदारों, डिजाइनरों और फैशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों तक मुबारकपुर सिल्क की पहुंच को और मजबूत किया जाएगा।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि—
“यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि मुबारकपुर सिल्क के वैश्विक पुनर्जागरण की शुरुआत है। जब हमारे बुनकरों के हाथ बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है; और जब हमारे युवा नेतृत्व करते हैं, तो भविष्य नई संभावनाओं से भर जाता है।”
प्रदर्शनी ने यह सिद्ध किया कि परंपरा और नवाचार का समन्वय ही स्थानीय कला, बुनकर समुदाय और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
“हमारी विरासत हमारी जड़ है, नवाचार हमारा मार्ग है और भविष्य हमारी मंजिल है।”


