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श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से सभी पाप नष्ट होते हैं : श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च

सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 9416191877

महोत्सव के अंतर्गत मुंबई के कलाकारों द्वारा “मैं अयोध्या हूं” महा नाट्य, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात रासाचार्य स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा “रसराज” के द्वारा रासलीला व भजन गायक पण्डित मुकुल द्विवेदी के द्वारा श्रीराधा नाम संकीर्तन की प्रस्तुति दी गई।

वृन्दावन : रमणरेती रोड़ स्थित फोगला आश्रम में श्रीहित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट, वृन्दावन एवं श्रीमद्भागवत कथा परिवार, रायपुर (छत्तीसगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ठाकुरश्री विजय राधावल्लभ लाल व ठाकुरश्री प्रियावल्लभ लाल महाराज के द्वादश दिवसीय 212वें पाटोत्सव के अंतर्गत चल रहे 170 श्रीमद्भागवत के मूल पारायण व श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन व्यास पीठ पर आसीन श्रीहित ललित वल्लभ नागार्च ने अपनी रसमयी वाणी के द्वारा देश-विदेश से आए समस्त भक्तों- श्रद्धालुओं श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है।इसका श्रवण करने से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। इसके श्रवण से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।साथ ही उसके जन्म व मृत्यु के भय का भी नाश हो जाता है।जीव के कल्याण के लिए यदि सबसे उत्तम ग्रंथ है,तो वह श्रीमद्भागवत महापुराण है।


उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में समस्त वेदों, पुराणों, उप पुराणों, शास्त्रों व उपनिषदों आदि धर्मग्रंथों का सार निहित है।इसका श्रवण,वाचन व अध्ययन तीनों ही कल्याणकारी हैं।साथ ही श्रीधाम वृन्दावन जैसी पावन भूमि में इसका श्रवण करना शतगुणा अधिक फलदाई व पुण्यदाई होता है।
रात्रि को मुंबई के प्रख्यात कलाकारों के द्वारा “मैं अयोध्या हूं” महा नाट्य का अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक मंचन किया गया।जिसके निर्माता योगेश अग्रवाल एवं निर्देशक प्रदीप गुप्ता हैं।इसके अलावा राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात रासाचार्य स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा “रसराज” के द्वारा रासलीला की अत्यन्त मनोहारी प्रस्तुति दी गई।साथ ही प्रख्यात भजन गायक पण्डित मुकुल द्विवेदी के द्वारा श्रीराधा नाम संकीर्तन का संगीतमय गायन किया गया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण विभाग के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, पूर्व ऊर्जा मंत्री व मथुरा से विधायक पण्डित श्रीकान्त शर्मा, आचार्य विष्णु मोहन नागार्च, प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, प्रख्यात भजन गायक पंडित बनवारी महाराज, आचार्य सुकृत लाल गोस्वामी, आचार्य विशाल लाल गोस्वामी, आचार्य गोविंद लाल गोस्वामी, आचार्य उदित मणि गोस्वामी, सुमनकांत पालीवाल, राधावल्लभ नागार्च (हितांशु), पण्डित रासबिहारी मिश्र, पण्डित जुगल किशोर शर्मा, रासाचार्य स्वामी अमीचंद्र शर्मा, डॉक्टर राजेश शर्मा, श्रीमती कमला नागार्च, आचार्य रसिक वल्लभ नागार्च, कीर्ति नागार्च, हितानंद
नागार्च, रसानंद नागार्च, प्रेमानंद नागार्च, दिव्यानंद नागार्च, डॉ. राधाकांत शर्मा, पण्डित तरुण मिश्रा, पण्डित भरत शर्मा, हितवल्लभ नागार्च, महोत्सव के मुख्य यजमान श्रीमती सिंधु-मुकेश गोयल (रायपुर, छत्तीसगढ़), श्रीमती अनिता-कमल अग्रवाल, श्रीमती कौशल-अमिताभ अग्रवाल, श्रीमती मिताली-दीपक अग्रवाल, श्रीमती कृष्णा-कैलाश अग्रवाल, श्रीमती निशा-अंकित अग्रवाल आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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