जनपद में लगातार गिरते तापमान एवं शीतलहर की संभावना को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने जनसामान्य के स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी

शीतलहर के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु दिशा-निर्देश जारी
जनपद में लगातार गिरते तापमान एवं शीतलहर की संभावना को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने जनसामान्य के स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि शीतलहर केवल असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, अतः सभी नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने से हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट, सांस लेने में कठिनाई, हाथ-पैरों का सुन्न होना तथा गंभीर स्थिति में जान का खतरा भी हो सकता है। नवजात शिशु, बुजुर्ग, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं, दिव्यांगजन, बच्चे, खुले में कार्य करने वाले श्रमिक, किसान एवं पशुपालक सर्वाधिक जोखिम में रहते हैं।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि शरीर को पूरी तरह ढककर रखें, गर्म कपड़ों की परतें पहनें तथा सिर, गर्दन, कान, हाथ व पैरों को विशेष रूप से सुरक्षित रखें। हाथों की सुरक्षा के लिए साधारण दस्तानों की बजाय मिटेंस का प्रयोग अधिक लाभकारी बताया गया, क्योंकि इनमें उंगलियां एक साथ रहने से गर्मी बनी रहती है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि अनावश्यक रूप से ठंडी हवा के संपर्क में न आएं, गीले कपड़े न पहनें, पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थ लें तथा पौष्टिक आहार व विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों का सेवन करें। ठंड में अत्यधिक कंपकंपी, बोलने में कठिनाई, अत्यधिक नींद, त्वचा का नीला या पीला पड़ना, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि बंद कमरों में अंगीठी, कोयला या मोमबत्ती जलाना खतरनाक हो सकता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनने का खतरा रहता है। हीटर अथवा आग का प्रयोग करते समय पूर्ण सावधानी बरतें।
पशुपालकों से पशुओं को सुरक्षित व ढके स्थानों पर रखने की अपील करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि शीतलहर से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते सावधानी बरती जाए। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।




