नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 129 वीं जयंती धूमधाम से मनाई

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : गत दिवस 23 जनवरी 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129 वीं जयंती मनाई जा रही है। एफ आर इस्लामिया इंटर कॉलेज,बरेली में भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई गई।प्रधानाचार्य तौकीर सिद्दीकी ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि यह दिवस भारत सरकार द्वारा पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था।वे सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी थे।देश की स्वतंत्रता के लिए वे आजीवन प्रयासरत रहे। अंग्रेजों से लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया। उन्होंने जय हिंद’ और ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा दिया जो अत्यधिक प्रचलन में आया। नेताजी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने सुप्रीम कमांडर अर्थात सर्वोच्च सेनापति के रूप में सेना को संबोधित करते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया। उन्होंने ब्रिटिश व कॉमनवेल्थ सेना से वर्मा इंफाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार बनाई जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, चीन, इटली, आयरलैंड और कोरिया सहित 11 देश की सरकारों ने मान्यता दी। 1944 में आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करवा लिया। प्रवक्ता डॉक्टर मेहंदी हसन ने कहा कि देश की सर्वोच्च परीक्षा सिविल सर्विसेज पास होने के बावजूद उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी में नौकरी करना पसंद नहीं किया और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेते हुए अपने देश को सर्वोपरि रखा।नेताजी का जीवन अनुशासन,निडरता, देशभक्ति और राष्ट्र सेवा का पाठ पढ़ाता है।हम सभी को उनके आदर्शों को अपनाकर एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए। सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताईहोकू( अब ताइपेई, ताइवान) में एक विमान दुर्घटना में गंभीर चोटें लगने से हुई लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर आज भी कई विवाद और षड्यंत्र सिद्धांत मौजूद है और भारत सरकार ने कई जांच की है। इस अवसर पर प्रवक्ता नदीम उज़ जफर, बृजेश कुमार शर्मा, आकिल यार खान,अनवर अली रिजवी,नदीम यार खान , जाकिर अकबर आदि शिक्षक मौजूद रहे।




