महात्मा गांधी स्वदेशी, स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भर भारत केस्वप्नदर्शी थे : डा. श्री प्रकाश मिश्र

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
संवाददाता – उमेश गर्ग।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा अहिंसा संवाद कार्यक्रम मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में आयोजित।
आज के समय में, जब भौतिकवाद और स्वार्थ समाज में असमानता और विघटन को बढ़ा रहे हैं, गांधीजी के नैतिक और मानवीय मूल्य न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि स्थायी शांति, सतत विकास और वैश्विक एकता के लिए आवश्यक भी हैं।

कुरुक्षेत्र 30 जनवरी : महात्मा गांधी के सामाजिक विचारों में नैतिकता और मानवीय मूल्यों का प्रतिपादन उनकी समग्र जीवन- दृष्टि का अभिन्न अंग था, जिसमें व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक व्यवहार और राजनीतिक गतिविधियों में नैतिक आदर्शों को सर्वोच्च स्थान दिया गया।मानवीय मूल्यों के अंतर्गत उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, समान अवसर, शोषण-मुक्त समाज, और पारस्परिक सहयोग पर बल दिया। यह विचार महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित अहिंसा संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किये। कार्यक्रम का मातृभूमि सर्वधर्म प्रार्थना से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी के जीवन पर अनेक द दृष्टांत प्रस्तुत किये।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा
महात्मा गांधी का सामाजिक दर्शन सत्य, अहिंसा, सर्वोदय और मानवीय गरिमा पर आधारित था। उन्होंने व्यक्तिगत आचरण में नैतिकता, अस्पृश्यता उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और ग्राम स्वराज को सामाजिक पुनर्गठन का आधार माना। उनका लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण था जो शोषण, वर्ग-भेद और हिंसा से मुक्त हो, जहाँ आत्मनिर्भरता व मानवीय प्रेम हो। सत्य और नैतिकता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा ने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी, बल्कि सामाजिक बुराइयों जैसे अस्पृश्यता, असमानता और शोषण के खिलाफ एक सशक्त आंदोलन को जन्म दिया।गांधीजी की दृष्टि में राजनीति का नैतिकीकरण, आर्थिक गतिविधियों में न्याय, और सामाजिक संबंधों में करुणा ही एक आदर्श और स्थायी समाज की स्थापना का मार्ग है। आज के समय में, जब भौतिकवाद और स्वार्थ समाज में असमानता और विघटन को बढ़ा रहे हैं, गांधीजी के नैतिक और मानवीय मूल्य न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि स्थायी शांति, सतत विकास और वैश्विक एकता के लिए आवश्यक भी हैं।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा गांधीजी का मानना था कि किसी भी समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब उसके नागरिक नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन जीएं और सत्य को अपने आचरण का सर्वोच्च मार्गदर्शक बनाएं। उन्होंने सत्य को परमेश्वर के समान मानते हुए इसे व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन दोनों का आधार बनाया तथा अहिंसा को सत्य की रक्षा और स्थापना का सर्वोत्तम साधन बताया। गांधीजी के विचार में नैतिकता का अर्थ केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि ऐसा व्यावहारिक जीवन-पथ है जो न्याय, करुणा, समानता और सेवा की भावना को प्रबल करता है। उनका मानना था कि सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया हिंसा, भय या दबाव से नहीं, बल्कि नैतिक जागरूकता, आत्मानुशासन और प्रेमपूर्ण संवाद से सफल हो सकती है। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, अध्यापक आदि उपस्थित रहें।

VV NEWS

राष्ट्रीय कार्यालय रमाकान्त पाण्डेय(गोपालपुरी) संरक्षक/संस्थापक ग्राम व पोस्ट- गोपालपुर (टावर) थाना व तहसील- मेहनगर जिला-आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पिंन कोड़-276204 मोबाईल-9838825561,7054825561 हेंड कार्यालय/प्रशासनिक कार्यालय जितेंद्र पटेल (प्रमुख संपादक/प्रशासनिक संपादक) ग्राम व पोस्ट- 495668 थाना व तहसील-जांजगीर जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ) पिंन कोड़-495668 मोबाईल-6265564514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

31 मार्च को पंजाबी धर्मशाला में युवा जेजेपी की बड़ी कार्यकर्ता बैठक दुष्यंत चौटाला होंगे मुख्य अतिथि

Fri Jan 30 , 2026
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877 दिग्विजय चौटाला करेंगे अध्यक्षता। कुरुक्षेत्र, 30 जनवरी : युवा जननायक जनता पार्टी (युवा जेजेपी) द्वारा संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने, युवाओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने तथा प्रदेश में संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ करने […]

You May Like

advertisement