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दिव्या ज्योति जागृती संस्थान फिरोजपुर की ओर से श्री गुरु रविदास जी की जयंती के उपलक्ष में सत्संग प्रोग्राम का किया गया आयोजन

(पंजाब) फिरोजपुर 01 फरवरी [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, फिरोजपुर की तरफ से श्री गुरु रविदास जी की जयंती के पवित्र दिन को समर्पित एक बड़ा सत्संग प्रोग्राम बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ लोकल आश्रम में आयोजित किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया।
सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी करमाली भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए श्री गुरु रविदास जी के जीवन दर्शन और शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने समाज को सिखाया कि भगवान हर इंसान के अंदर रहते हैं और उनकी प्राप्ति केवल पूर्ण गुरु की कृपा से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी के पवित्र श्लोकों में पूर्ण गुरु की पूरी महिमा गाई और कहा कि इस भजन में गुरु साहिब ने पूर्ण गुरु की महानता को बताया है। जब इंसान को पूरा गुरु मिल जाता है, तो ज़िंदगी के दुख, डर और अज्ञानता खत्म हो जाते हैं और अंदर से भगवान का प्रकाश दिखाई देने लगता है।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु रविदास जी का मुख्य संदेश था—
“मन चंगा तौ कठौती में गंगा।” यानी, अगर मन पवित्र हो जाए, तो भगवान को पाने के लिए बाहरी दिखावे की ज़रूरत नहीं है। सच्ची भक्ति, विनम्रता और गुरु की शिक्षा ही इंसान को भगवान से जोड़ती है।
साध्वी करमाली भारती जी ने भक्त मीरांबाई के जीवन का ज़िक्र करते हुए कहा कि मीरांबाई की पूरे सतगुरु की खोज और गुरु रविदास जी से उनका मिलन हमें सिखाता है कि गुरु ही आत्मा को संसार रूपी सागर से पार ले जाते हैं। गुरु रविदास जी ने मीरांबाई को अंदर के नाम का तोहफ़ा दिया और उनके जीवन को भक्ति के रस से भर दिया।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी हरजीत भारती जी ने बहुत ही मधुर भजन कीर्तन पेश किया। भजनों के ज़रिए गुरु रविदास जी के भजन, पूरे गुरु की महिमा और नाम सिमरन के महत्व को मतलब के साथ पेश किया गया, जिससे संगत भक्ति में डूब गई। प्रोग्राम में यह संदेश दिया गया कि गुरु रविदास जी का दिखाया रास्ता—सत्संग, सेवा और सिमरन—आज के ज़माने की सबसे बड़ी ज़रूरत है। इंसान को जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर एक ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए।




