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एम्स रायबरेली में कॉक्लियर इम्प्लांट पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

रायबरेली
रिपोर्टर विपिन राजपूत

एम्स रायबरेली में कॉक्लियर इम्प्लांट पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

एम्स, रायबरेली के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग द्वारा मूक एवं बधिर बच्चों तथा उनके अभिभावकों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट संबंधी एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गंभीर श्रवण हानि से पीड़ित बच्चों में समय रहते पहचान और उपचार के महत्व को समझाना था।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि जिन बच्चों को सामान्य हियरिंग एड से लाभ नहीं मिलता, उनके लिए कॉक्लियर इम्प्लांट एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह एक विशेष शल्य प्रक्रिया है, जिसमें आंतरिक कान के क्षतिग्रस्त भाग को बाईपास कर श्रवण तंत्रिका को सीधे उत्तेजित किया जाता है, जिससे बच्चे ध्वनि को पहचानने लगते हैं और उनकी वाणी एवं भाषा विकास में सुधार होता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अन्नन्या सोनी ने अपने संबोधन में कहा, “श्रवण हानि की शीघ्र पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते उपचार किया जाए तो बच्चे सामान्य विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं। संस्थान के कार्यकारी निदेशक. डॉ. अमिता जैन के मार्गदर्शन में एम्स रायबरेली का उद्देश्य उन्नत चिकित्सा सुविधाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी उच्च स्तरीय सेवाओं के माध्यम से हम दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कार्यक्रम में अभिभावकों को सर्जरी की प्रक्रिया, पूर्व एवं पश्चात जांच, मैपिंग तथा स्पीच थेरेपी की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, सफल कॉक्लियर इम्प्लांट से लाभान्वित बच्चों के उदाहरण साझा किए गए, जिससे उपस्थित परिवारों में आशा और विश्वास का संचार हुआ।
ईएनटी विभाग द्वारा इस प्रकार की पहल समाज में जागरूकता बढ़ाने और श्रवण बाधित बच्चों को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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