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ऐं दुनिया बनाने वाले युद्धों पर विराम कर चौतरफा खुशहाली कर दे,आमीन

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )

बरेली : सिविल लाइन स्थित मस्जिद नोमहला शरीफ़ में हज़रत ख्वाजा नासिर मियाँ रहमतुल्लाह अलेह के तीन दिवसीय 121 वें उर्से मुबारक की शुरुआत रमज़ान की सहरी और बाद नमाज़े फ़ज़र कुरआन ख़्वानी से हुई। उर्स की महफ़िल की सरपरस्ती दरगाह के सज्जादानशीन हज़रत ख़्वाजा सुल्तान अहमद नासरी कर रहे है। बाद असर परचम कुशाई हुई,असर मग़रिब बीच हज़रत साबिर पाक कलियरी के कुल शरीफ़ की रस्म अदायगी के बाद एक साथ सैकड़ो रोज़ेदार अक़ीदतमन्दो ने इफ्तारी के दस्तरख्वान पर रोज़ा कुशाई की। समाजसेवी एवं प्रवक्ता पम्मी ख़ाँ वारसी ने बताया कि नमाज़े मग़रिब बाद ख़ुसूसी दुआ की गई।इस मौके पर नायब सज्जादानशीन ख़्वाजा सलमान अहमद नासरी,ख़्वाजा श्यान हसन,ख़्वाजा वसीम अहमद नासरी,सूफी वसीम मियाँ नासरी साबरी, शाने अली कमाल मियाँ,शाहिद रज़ा नूरी,नन्ना मियाँ,हसनैन आदि शामिल रहे।
ईशा तरावीह बाद ऑल इंडिया मुशायरा के महफ़िल परिसर में सजाई गई।
शोराये इकराम ख्वाजा सुल्तान अहमद ने पढ़ा।
मेरी तक़दीर में भी एक खम है । उसके गेंसु-ए-नीम बरहम का ।।
अश्क रेज़ी मेरा इलाज भी है । अश्क करते है काम मरहम का ।।
एक भी आशना-ए-दर्द नही । ये सबब है सुकूते’ पेहम का ।।
शक्ले गंदूम से साफ ज़ाहिर है । क्या सबब है ज़वाले आदम का ।।
काश इस कोम को कोई बतलाए । क्या सबब है सुकूते” पेहम का ।।
याद में उस गली की कलियर में । एक प्याला पियेंगे ज़म-ज़म का ।।
ज़ीस्त अंजुम की ओर क्या कहिए । एक नमूना है अज़मे मोहकम का ॥
शायर बिलाल सहारनपुरी
यूँ ही नहीं किसी के भी धोखे में आ गए।
हम दिल की मानते थे दिलासे में आ गए। शायर ख़्वाजा शायान हसन मेरी ता’रीफ़ में ऐ दोस्त क़सीदे मत पढ़ मेरी ख़ूबी तो यही है कि मिरा दाम नहीं जो भी कहते हैं वो ‘शायाँ’ उन्हें कहने दो
कौन मज्नूँ है जो इस राह में बदनाम नहीं शायर
मौलाना हसन रज़ा पुर्नवी
ख़ुर्रम सुल्तानी खुर्शीद हैदर
तस्लीम सरबर सीतापुरी
फकरे मेरठी सलमान जाफर
वसीम रजुआपूरी सलमान आरिफ अदनान कासिफ
शादाब कासगंज ख़्वाजा श्यान अहमद नासरी ने अपने अपने कलामों में अक़ीदतमन्दी का इज़हार किया। निज़ामत इसरार नसिमि और कनवेज़ बिलाल राज़ ने की।देररात तक महफ़िल जारी रही।

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