साहित्यिक चिंतन विद्यार्थियों में विवेकपूर्ण संवेदनशीलता को करती है विकसित : डॉ. जिम्मी शर्मा

केयू आईआईएचएस लिटरेरी क्लब द्वारा पुस्तक पठन सत्र में साहित्यिक कृतियों को लेकर हुआ मंथन।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 18 मार्च : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज के लिटरेरी क्लब द्वारा आयोजित पुस्तक पठन सत्र में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए क्लब समन्वयक डॉ. जिम्मी शर्मा ने कहा कि साहित्यिक चिंतन एवं विविध साहित्यिक कृतियों का अध्ययन विद्यार्थियों में विवेकपूर्ण संवेदशीलता को विकसित करती है। ये कृतियां पाठकों को साहित्यिक शब्दों में निहित अर्थों की गहनता को सरलता से समझने जुड़ने, विभिन्न प्रश्नों को करने तथा साहित्य के प्रति अधिक सूक्ष्म, मानवीय और चिंतनशील समझ विकसित करने में सक्षम बनाती हैं।
डॉ. जिम्मी शर्मा ने कहा कि पुस्तक पठन कार्यक्रम केवल अकादमिक जुड़ाव तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि ये शिक्षार्थियों में आलोचनात्मक चेतना और भावनात्मक गहराई को भी आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि ’द टाइम मशीन’ जैसी कृतियाँ प्रगति और समय से जुड़े सवालों को को प्रदर्शित करती है जबकि ’रॉबिन्सन क्रूसो’ पहचान और एकांत पर चिंतन पर आधारित हैं। वहीं ’वदरिंग हाइट्स’ और ’डेमन स्लेयर’ पाठकों को भावनात्मक और नैतिक परिदृश्यों से परिचित कराती हैं तथा ’व्हाइट नाइट्स’ आत्म-निरीक्षण को बढ़ावा देती है। ’द अल्केमिस्ट’ में जीवन के उद्देश्य और नियति के लिए एक दार्शनिक मार्गदर्शक बताया गया है जबकि ’इंडिया 2020’ और ’मेरी इक्यावन कविताएँ’ को सांस्कृतिक और काव्य संवेदनशीलता से ओत-प्रोत दूरदर्शी सोच को बढ़ावा देने वाली कृतियों के रूप में सराहा गया। लिटरेरी क्लब के सदस्यों ने अपने पुस्तक पठन के अनुभवों को साझा किया।
लिटरेरी क्लब में छात्रा अर्पिता, सिमरन, कामना, श्रीज़ा, मोहिनी, भावना व परिणिता ने कृतियों के माध्यम से अपनी साहित्यिक दृष्टिकोण को व्यक्त किया। डॉ. जिम्मी शर्मा ने बताया कि यह पुस्तक पठन सत्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत विश्वविद्यालय छात्रों के बीच साहित्यिक जुड़ाव, आलोचनात्मक सोच और समग्र बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सदैव तत्पर रहता है।




