
नगर निगम पर 302 का मुकदमा चलना चाहिए, हजारों पेड़ों की मौत का जिम्मेदार कौन?
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : अयूब खान चौराहे से चौपला रोड तक नगर निगम द्वारा हाल ही में लगाए गए पौधे और पेड़ बिना पानी के सूखने की कगार पर हैं। यदि समय रहते इनकी सिंचाई नहीं की गई तो लाखों रुपये खर्च कर किए गए वृक्षारोपण अभियान का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। पौधारोपण के बाद नियमित देखभाल और पानी देना उतना ही जरूरी है जितना पौधे लगाना। कई नगर निगमों द्वारा गर्मी में पौधों को बचाने के लिए विशेष सिंचाई अभियान और पानी के टैंकर लगाए जाते हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ लगाए तो गए, लेकिन उनकी देखभाल नहीं हो रही है। भीषण गर्मी में पानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं। यदि यही स्थिति रही तो पर्यावरण संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया सरकारी धन व्यर्थ साबित होगा।
अयूब खान चौराहा से चौपला रोड तक लगे सभी पौधों की तत्काल सिंचाई कराई जाए, स्मार्ट सिटी के तहत जो पौधे लगाए गए हैं वह भी सूख रहे हैं स्मार्ट सिटी के तहत शर्मा कंस्ट्रक्शन 5 साल का कांटेक्ट होने के बाद भी देखभाल नहीं हो रही है जिससे हजारों पेड़ सूख गए हैं क्या पर्यावरण अभियंता की जिम्मेदारी नहीं बनती किस समय-समय पर इसकी देखरेख करवाए नगर आयुक्त महोदय को ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्यवाही करना चाहिए जो लापरवाही कर रहे हैं
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
पौधों की देखरेख के लिए नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए।
वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
पेड़ केवल सजावट नहीं, बल्कि शहर की ऑक्सीजन हैं। उन्हें लगाना ही नहीं, बचाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।


