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नाटक ‘‘राम नाम सत्य है’’ ने दिखाई जिंदगी और मौत के बीच की बेबसी

मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक ताने बाने की सच्चाई दिखा गया नाटक ‘‘राम नाम सत्य है’’
नाटक ‘‘राम नाम सत्य है’’ से सम्पन्न हुआ रंगरथ नाट्य महोत्सव, भिवानी के कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा।

थानेसर, प्रमोद कौशिक 30 मार्च : विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में आयोजित तीन दिवसीय रंगरथ नाट्य महोत्सव का रविवार को समापन हो गया। कला परिषद के निदेशक विवेक कालिया के दिशा-निर्देश में 27 मार्च से शुरू हुए महोत्सव में पहले दिन सफीदों जींद के कलाकारों ने ऐतिहासिक नाटक सम्राट अशोक का मंचन किया। वहीं दूसरे दिन दिल्ली के कलाकारों ने हास्य नाटक घर का न घाट का मंचित कर कुरुक्षेत्र वासियों को खूब गुदगुदाया। उत्सव के समापन पर मीरा कल्चर सोसायटी भिवानी के कलाकारों द्वारा चंद्रशेखर फणसलकर का लिखा और सोनू रोंझिया के निर्देशन में नाटक राम नाम सत्य है मंचित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। नाटक मंचन से पूर्व वरिष्ठ मीडियाकर्मी विनोद शर्मा तथा रजनीश गुप्ता सहित सुरेखा मखीजा, नीरज सेठी और धर्मपाल गुगलानी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
नाटक ने दिखाई रिश्तों और समाज की कड़वी सच्चाई।
नाटक राम नाम सत्य है में कलाकारों ने एडस जैसे रोग से ग्रस्त और नशे की लत में पड़े लोगों की मनोदशा को दिखाया। गोपीनाथ की कहानी के माध्यम से कलाकारों ने दिखाया किस तरह गोपीनाथ एक सभ्य व्यक्ति से नशे की गिरफ्त में चला जाता है और उसकी जिंदगी बर्बाद होनी शुरू हो जाती है। कलाकारों के सशक्त अभिनय और संवेदनशील संवादों के कारण नाटक पूर्णतया रोग और नशे के कारण जिंदगी व मौत के बीच फैली बेबसी को दिखाने में कामयाब रहा। कलाकारों ने बेहद संजीदगी के साथ अपने अपने किरदारों को प्रस्तुत किया। नाटक ने जहां एड्स रोगियों की मानसिक असंतुलित स्थिति और जिंदा रहने की बेबसी को बयान किया, वहीं उनके मन की पीड़ा, घबराहट और मादक पदार्थों से नशे की गिरफ्त में फंसकर खराब फेफड़ों के साथ मौत की राह पर चलकर जिंदा रहने का लालच भी साफ नजर आया। नाटक जीवन, मृत्यु और सामाजिक यथार्थ के गहरे प्रश्नों को छूता नजर आया। मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों और समाज की कड़वी सच्चाइयों को भावनात्मक और सधे हुए अंदाज़ में प्रस्तुत करते हुए कलाकारों ने दर्शकों की भरपूर वाहवाही बटौरी। नाटक में अनूप कुमार, पुलकित आर्य, अमन कुमार, आस्था दहिया, नवीन, इशिका गोयल, ओमप्रकाश, अंकित कुमार, सचिन, आदित्य, अरुण ने सहयोग दिया। संगीत संचालन सोनू रोंझिया ने तथा प्रकाश व्यवस्था विश्वजीत ने सम्भाली। नाटक के अंत में सोनू रोंझिया को हरियाणा कला परिषद की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

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