मां दुर्गा रात्रि जागरण, यज्ञ और भंडारा श्रद्धा और भक्ति से हुआ

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 1 अप्रैल : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने जानकारी दी कि 31 दिसम्बर 1963 को श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली की स्थापना उनके पूज्यनीय पिता स्वर्गीय पण्डित शेषमणि मिश्रा संस्थापक जी ने समस्त पिपली के श्रद्वालु भक्तों द्वारा करवायी थी।
तभी से नवरात्र में चैत्र और आश्विन मॉस की त्रयोदशी को भगवती जागरण और चौदस नवरात्र को यज्ञ व भंडारा प्रारम्भ हुआ था।
समस्त भक्तों के सहयोग से भगवती जागरण चैत्र मॉस की त्रयोदशी नवरात्र, मंगलवार, 31मार्च 2026 को भजन गायक सोमदत्त हुनर एंड पार्टी द्वारा किया गया।
चौदस नवरात्र बुधवार , 1 अप्रैल 2026 को यज्ञ एवं भण्डारा मन्दिर परिसर में हुआ I
श्री दुर्गा देवी मन्दिर, पिपली के पुजारी पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मन्त्रों से सतीश, बेबी के परिवार सहित गुरु पूजा, नवग्रह पूजन और सभी प्राण प्रतिष्ठित देवी देवताओं की अर्चना श्रद्धा से करवाई। मां दुर्गा की ज्योति प्रज्वलित की।
गायक सोमदत्त हुनर एंड पार्टी ने चलो बुलावा आया है, अंबे है मेरी मां, हे मां शारदा, अच्युतम केशवम आदि सुंदर भेंटे गाई और भगवान राधा कृष्ण और मां दुर्गा की सुन्दर झाकियां निकाली गई। यज्ञ के मुख्य यजमान सुनीता ने परिवार सहित यज्ञ में आहुतियां वैदिक मंत्रों से दी गई।
समस्त विश्व कल्याण हेतु माँ दुर्गा का संकीर्तन, श्री दुर्गा चालीसा पाठ और संकीर्तन सुमित्रा पाहवा, पायल सैनी, निशा अरोड़ा,ऊषा शर्मा,आशा कवात्रा, सरोज शर्मा, शिमला धीमान,भक्त सुशील तलवाड़ ,और छोटे बच्चो के साथ सभी भक्तों ने श्रद्धा अनुसार किया। मां दुर्गा की आरती के पश्चात सभी भक्तों ने भंडारे का प्रसाद श्रद्धा से लिया। विशेष श्रद्धालु राम कुमार गर्ग, ज्ञान चंद गर्ग, सुरेन्द्र गर्ग, केवल कृष्ण छाबड़ा, नीरज सिंगला, पंकज बजाज, राम नाथ छाबड़ा, अशोक अरोड़ा, नरेश शर्मा, विनोद छाबड़ा, सतपाल बंसल, सतपाल सैनी, राम कमल पाहवा, सतपाल धर्मशोत और चंपा देवी गुप्ता आदि के साथ समस्त भक्तों ने हिस्सा लिया।
पीठाधीश डॉ. मिश्रा ने पार्षद पंकज खन्ना, सतीश और सुनीता को परिवार सहित स्मृति चिन्ह और मां दुर्गा की चुनरी से सम्मानित किया। प्रवचन में डॉ. मिश्रा ने बताया कि सनातन धर्म में भगवान का ध्यान, आरती, संकीर्तन, जीव जंतुओं और गौ सेवा के साथ माता पिता और बुजुर्गों की सेवा का बहुत महत्त्व है। 4 मुख्य पुरुषार्थ अर्थ ,धर्म, काम और मोक्ष विशेष है।
ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धारा, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि सदा साक्षी रहना है। चाहे कोई साधना करो या संसार में जीवन को जी रहे हो, परंतु आत्म स्मरण ना छूटे। माला के मनके तो बहुत हो सकते हैं, लेकिन जो धागा है वह साक्षी का है, अगर इस बात को जान लो, तो हमेशा आत्म सुमिरन में रहोगे।
अपने आनंद का सिंचन कैसे करोगे ? आनंदसति योग। आनंदसति योग में आनंद का सिंचन होता रहता है।




