व्यक्ति का मन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी बाधा: शिवानी आध्या

व्यक्ति का मन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी बाधा: शिवानी आध्या

केयू में भावनात्मक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक कल्याण पर विशेष संवाद आयोजित।

थानेसर, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 21 अप्रैल : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में छात्र कल्याण विभाग द्वारा मंगलवार को सीनेट हॉल में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और मोटिवेशन को बढ़ावा देने के लिए “स्टूडेंट इमोशनल हेल्थ, स्पिरिचुअल वेलनेस एंड मोटिवेशन” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध माइंडसेट और वेलनेस कोच शिवानी आध्या ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण और मानसिक दृढ़ता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का मन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी बाधा होता है। उन्होंने बताया कि हमारा कॉन्शियस माइंड एक “गेटकीपर” की तरह कार्य करता है, जो हर विचार को परखता है, जबकि सबकॉन्शियस माइंड हमारी लगभग 90 प्रतिशत आदतों, व्यवहार और निर्णयों को प्रभावित करता है। इसलिए यदि हम अपने सबकॉन्शियस माइंड को सकारात्मक विचारों से भर दें, तो जीवन में बड़े बदलाव संभव हैं।
शिवानी आध्या ने सोने से पहले और जागने के बाद के 45-45 मिनट को “गोल्डन टाइम” बताते हुए कहा कि इस दौरान कॉन्शियस माइंड कम सक्रिय होता है, जिससे सकारात्मक विचार सीधे सबकॉन्शियस माइंड में प्रवेश करते हैं। इस समय का सही उपयोग आत्मविश्वास बढ़ाने और नकारात्मक सोच को कम करने में सहायक होता है।
उन्होंने आभार व्यक्त करने की आदत पर जोर देते हुए कहा कि हमें जीवन में उपलब्ध हर चीज स्वास्थ्य, परिवार, अवसर और अनुभव के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। इससे मन में संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही उन्होंने मैनिफेस्टेशन की एक सरल तकनीक साझा की, जिसमें प्रतिभागियों को प्रतिदिन पाँच छोटी-छोटी इच्छाएँ लिखने के लिए प्रेरित किया गया। इन इच्छाओं के पूर्ण होने से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति को अपने विचारों की शक्ति पर विश्वास होने लगता है।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी ने कहा कि यह कार्यक्रम कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के दृष्टिकोण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो हर परिस्थिति में स्वयं को संभाल सकें और अपने भीतर पूर्णता का अनुभव करें।
प्राक्टर प्रो. अनिल गुप्ता ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में एकल परिवारों और मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कारण भावनात्मक दूरी बढ़ रही है। ऐसे में अपनी मानसिक और भावनात्मक सेहत का ध्यान रखना और अपनों के साथ समय बिताना आवश्यक है।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने कहा कि जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सच्ची खुशी आंतरिक संतुलन और सकारात्मक सोच में निहित है। कार्यक्रम में मंच का संचालन श्रुति शर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुनीता दलाल, डॉ. सलोनी दिवान, डॉ. ज्ञान चहल, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. राजरतन, डॉ. पूजा सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

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