लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर जी की जयंती पर कांग्रेस कार्यालय तिलकभवन में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि

लोकेशन रायबरेलीरिपोर्टर विपिन राजपूत

रायबरेली 31मई, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर जी की जयंती पर कांग्रेस कार्यालय तिलकभवन में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि

अर्पित की गई,
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी ने कहा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की एक कुशल, न्यायप्रिय और लोकप्रिय आदर्श शासक एवं राजनीतिक प्रशासक रही हैं, वह एक लोक कल्याणकारी शासक थीं, जिन्होंने अपने राजकोष का अधिकतम संभव सदुपयोग जनहित के कार्यों और धर्म कार्य के लिये किया। दरअसल वह अपने को शासक नहीं, ईश्वर की सेविका मानती थीं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन जनकल्याण के लिये समर्पित कर दिया, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के साथ ही उनकी शिक्षा सहित सशक्तिकरण हेतु काम किया।
शहर अध्यक्ष धीरज श्रीवास्तव ने कहा की भेदभाव रहित होकर जनता की सेवा के चलते अहिल्याबाई को लोक माता कहा गया। उन्होंने जातीय और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिये जिस तरह काम किया, उससे इतिहास में उनकी छवि सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं पुनरुत्थान के साथ साथ एक सेकुलर या धर्मनिरपेक्ष शासक की रही है। सभी धर्मों के लोगों को उन्होंने समान रूप से संरक्षण दिया और सबके न्यायोचित हितों का ध्यान रखा,
कांग्रेस प्रवक्ता महताब आलम ने कहा की महारानी अहिल्या बाई होल्कर सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सद्भावना की मिसाल जैसी शासिका रहीं। अपने शासन काल में उन्होंने सोमनाथ, बद्रीनाथ, मथुरा, अयोध्या, केदारनाथ, रामेश्वर एवं गया के विष्णुपद मंदिर सहित जहां हजारों मंदिरों का निर्माण या जीर्णोद्धार कराया और धर्मशालायें, प्याऊ एवं कुओं एवं तालाबों का लोकहित में निर्माण कराया, वहीं काशी में मध्यकाल में थोड़े गये विश्वनाथ मंदिर पुनर्निर्माण सहित घाट, दीप स्तम्भ, कुंड आदि बनवाये। इसके बावजूद काशी में पुराने विश्वनाथ मंदिर पर बनी ज्ञानवापी की मस्जिद की जगह किसी तोड़ फोड़ के टकराव की जगह उसके बगल में उन्होंने नये विश्वनाथ मंदिर का निर्माण विद्वत सभा के विमर्श से करवाया था। इस तरह धर्म और संस्कृति के लिये भी काम किया, तो टकराव एवं द्वंद्व को कहीं आमंत्रित किये बिना और समाज में सद्भाव एवं भाईचारे को आहत किये बिना।
अपनी इस तरह की रीति नीति के चलते अहिल्याबाई सर्व समाज के विश्वास की प्रतिनिधि शासक रहीं।
फलतः लोकजीवन में उनके प्रति व्यापक समादर का भाव रहा है।
काशी में मणिकर्णिका घाट पर उनकी प्रतिभा स्थापित थी, लेकिन यह दुर्भाग्य का विषय रहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास के नाम पर उस हेरिटेज स्थल पर भारी तोड़ फोड़ के क्रम में महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तक भी तोड़ दी, जिसकी जन-मानस में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। शासन प्रशासन ने विरोध बढ़ने पर उसके लिये खेद जताने की जगह पूरे मामले को नकारने की ही कोशिश की।
इस तरह अहिल्याबाई होलकर का एक राजतंत्रीय शासक के रूप में भी जीवन, कृतित्व एवं यश लोकतांत्रिक आदर्श, सामाजिक समरसता एवं समावेशी भावना की नजीर रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करते हुये भी नफरत और विभेद की राजनीति करने वालों सबक लेना चाहिए। दूसरी ओर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समरसता भाव से काम करने वालों को उनसे समावेशी एवं सद्भावना युक्त राजनीति की प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिये।
इस अवसर पर विजय शंकर अग्निहोत्री,राजकुमार दीक्षित,जे पी त्रिपाठी,सुनील सिंह भदौरिया, सूर्यकुमार बाजपेई, सर्वोत्तम मिश्र, मनोज मिश्रा, आर के सिंह, अजीजुल हसन, शादाब खान, केसी शुक्ल, नितिन कुमार, मोहम्मद सुहैल, पोलू खान सत्येंद्र श्रीवास्तव सहित आदि लोग उपस्थित रहे.

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