गुरुकुल कुरुक्षेत्र में गूंजा वैदिक घोष, राष्ट्रीय शिविर में 500 युवाओं ने धारण किया ‘यज्ञोपवीत’

थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 11 जून : ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक नगरी कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। अवसर था सार्वदेशिक आर्यवीर दल के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय शिविर का, जहाँ देश के 15 प्रान्तों से आए लगभग 500 युवाओं ने आचार्य नन्दकिशोर के ब्रह्मत्व में सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार कर ‘यज्ञोपवीत’ (जनेऊ) धारण किया। वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों के बीच इन युवाओं ने अपने जीवन को राष्ट्र, संस्कृति और मानवता के प्रति समर्पित करने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर गुरुकुल के मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, व्यायाम शिक्षक प्रवीण आर्य सहित अन्य प्रशिक्षक मौजूद रहे।
वैदिक दर्शन के अनुसार, यज्ञोपवीत मात्र एक सूत का धागा नहीं, बल्कि मनुष्य का ‘दूसरा जन्म’ (द्विजत्व) है। शिविर के मुख्य आचार्य और विद्वानों ने इस अनुष्ठान के आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। आज के आधुनिक युग में जहाँ युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहीं गुरुकुल कुरुक्षेत्र का यह प्रयास युवाओं को अपनी जड़ों अर्थात् वैदिक संस्कृति से जोड़ने की एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल है। यज्ञोपवीत धारण करने के बाद सभी आर्यवीरों ने देश की एकता, अखंडता और वैदिक धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।
आचार्य नन्दकिशोर ने कहा कि यज्ञोपवीत के तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रति कर्तव्यबोध कराते हैं। यह युवावस्था में कदम रख रहे बालकों को संयम, सदाचार और विद्या अर्जन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इन तीनों धागों को मिलाकर जो एक मुख्य गांठ (ग्रंथि) लगाई जाती है, उसे ‘ब्रह्मज्ञान’ या ‘गायत्री’ की ग्रंथि कहा जाता है। आर्य समाज के अनुसार, इसका अर्थ है कि ज्ञान, कर्म और उपासना जब एक साथ मिलते हैं, तभी मनुष्य ईश्वर (ब्रह्म) को प्राप्त कर सकता है। एक आर्यवीर के लिए यज्ञोपवीत उसके आत्मबल और धर्मनिष्ठा का प्रतीक है, जो उसे समाज में फैल रही कुरीतियों से लड़ने और देश की रक्षा करने का साहस देता है।
विदित हो कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत जी की प्रेरणा से सार्वदेशिक आर्यवीर दल एवं वीरांगना दल के राष्ट्रीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 1000 युवक-युवतियों जीवन निर्माण एवं वैदिक संस्कारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। शिविर की सम्पूर्ण व्यवस्था गुरुकुल कुरुक्षेत्र द्वारा प्रदान की जा रही है, सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती जी एवं सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्य के दिशा-निर्देशन में अनुभवी प्रशिक्षक प्रतिदिन युवाओं को विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं, साथ ही बौद्धिक सत्र में अनेक विद्वानों के प्रवचन में युवाओं के मध्य किये जा रहे हैं।

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