
प्राइवेट कंपनी को रजिस्ट्री कार्य सौंपने का विरोध: यूपी में अनिश्चितकालीन हड़ताल, ठप रहा कामकाज
आजमगढ़।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री कार्य को एक निजी कंपनी के माध्यम से संचालित करने के प्रस्तावित निर्णय के खिलाफ प्रदेशभर में आक्रोश फूट पड़ा है। इस फैसले के विरोध में राज्य के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और मुंशियों ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि सरकार का यह कदम उनके रोजगार, अधिकारों और सम्मान पर सीधा आघात है।
पहले ही दिन ठप रहा ई-पंजीयन, करोड़ों के राजस्व का नुकसान
हड़ताल के कारण प्रदेश के समस्त उप निबंधक कार्यालयों में तालाबंदी जैसी स्थिति रही और रजिस्ट्री संबंधी सभी कार्य पूरी तरह प्रभावित हुए।
राजस्व को झटका: आंदोलनकारियों के अनुसार, ई-पंजीयन कार्य पूरी तरह ठप होने से सरकार को पहले ही दिन लगभग 7 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की आशंका है।
चेतावनी: यदि सरकार ने इस निर्णय को जल्द वापस नहीं लिया, तो यह वित्तीय नुकसान और अधिक बढ़ सकता है।
जनता परेशान: हड़ताल के चलते दूर-दराज से आए आम नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यों के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई: आंदोलनकारी
दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह तथा महामंत्री अजय कुमार मौर्य के नेतृत्व में आजमगढ़ समेत पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया जा रहा है। आंदोलन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
”यह संघर्ष केवल रोजगार बचाने का नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा का है। हम एक हैं तभी सुरक्षित हैं, संगठित हैं तभी सक्षम हैं।”
— आंदोलनकारी वक्ता
फैसला वापस हो: रजिस्ट्री कार्य को किसी निजी कंपनी को ठेके पर देने का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाए और वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखा जाए।
हितधारकों की सहमति जरूरी: विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के नाम पर कोई भी बदलाव अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और मुंशियों की सलाह के बिना न किया जाए।
सुरक्षा की गारंटी: आंदोलनकारियों ने अपने संवैधानिक, वैधानिक अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।
आंदोलन में भारी संख्या में जुटे लोग
इस बड़े आंदोलन में कोषाध्यक्ष अमजद शेख सहित भारी संख्या में कानूनी और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े पेशेवर शामिल हुए। प्रदर्शन में मुख्य रूप से उदय प्रताप सिंह, प्रवेश दीक्षित, पंकज तिवारी, अवशेष कुमार यादव, सुमंत सिंह, रमेश चौहान, उमेर खान, मंगला सिंह, अभय नारायण कुंवर, जनार्दन सिंह, अभय कुमार, दूधनाथ मधुकर, बिपिन सिंह, रूपचंद्र सिंह, रमेश यादव, शैलेंद्र कुमार सिंह, अजय राय, बिनोद अस्थाना, देशराज चौहान, आनंद कुमार, मनोज चौहान, शशिकांत सिंह, सोनू कुमार, रामाश्रय सिंह, राकेश यादव, अंकित सिंह, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, कपिलदेव यादव, सूरज प्रकाश यादव, अतुल कुमार, प्रवीण कुमार, परपुदमन मौर्य तथा शिवांगी यादव सहित सैकड़ों लोग एकजुट नजर आए।
आगे की रणनीति:
आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल और उग्र रूप से जारी रहेगी।


