

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। एक आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट ने विभाग में प्रमोशन से लेकर वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं, जिससे प्रदेश की जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट पतरू राम विश्वकर्मा ने इस पूरे मामले में सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ का ध्यान आकर्षित करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा शिकायती पत्र
विश्वकर्मा के मुताबिक, उन्होंने 11 जून 2026 को महामहिम राज्यपाल को पंजीकृत डाक के जरिए एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (आयुष) को भी भेजी गई हैं।
शिकायत में उठाए गए मुख्य मुद्दे और आरोप:
डीपीसी (DPC) न होना और खाली पद: विभाग का सबसे बड़ा संकट यह है कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें लंबे समय से नहीं हुई हैं। इसके चलते होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी निदेशालयों में अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद खाली पड़े हैं।
व्यवस्था ठप, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित: खाली पदों को भरने के लिए मेडिकल ऑफिसर्स और शिक्षकों को निदेशालयों से संबद्ध (Attach) करना पड़ा है। इसका सीधा असर मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई और सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है, जो लगभग ठप होने की कगार पर हैं।
₹23 की दवा ₹250 में खरीदने का आरोप: एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक्टिविस्ट ने होम्योपैथिक दवा खरीद में बड़े घोटाले का दावा किया है। उनका आरोप है कि विभाग द्वारा महज ₹23 की दवा को ₹250 की अत्यधिक कीमत पर खरीदा गया है।
अवैध तैनाती और वित्तीय अनियमितता: संविदा पर तैनात सहायक लेखाकार दीप यादव और स्वागती अखिलेश्वर पांडेय का मूल तैनाती स्थल अयोध्या है, लेकिन वे निदेशालय और प्रमुख सचिव कार्यालय में काम कर रहे हैं। नियम विरुद्ध तरीके से उनका वेतन अयोध्या से निकाला जा रहा है, जो सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ी है।
संदिग्ध पद से RTI का जवाब: आरटीआई के तहत मांगी जा रही जानकारियों का जवाब एक ऐसे ‘सहायक जनसूचना अधिकारी’ के नाम से दिया जा रहा है, जिसके पद की वैधता ही संदिग्ध है। इसके अलावा, IGRS पर की गई शिकायत का जवाब प्रमुख सचिव के बजाय निदेशक (होम्योपैथी) द्वारा दिया गया, जिसे शासन स्तर पर टालमटोल की कोशिश माना जा रहा है।
एक्टिविस्ट की मांग:
पतरू राम विश्वकर्मा ने मांग की है कि डीपीसी (DPC) की प्रक्रिया को तुरंत पूरा कर सभी रिक्त पदों को भरा जाए। साथ ही, दवा खरीद घोटाले और अवैध नियुक्तियों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर शिकायत के बाद शासन और आयुष मंत्रालय इन कथित प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं पर क्या कदम उठाता है।


