
सह संपादक – डॉ. संजीव कुमारी।
लेखिका : अधिवक्ता सुचेता नाथ (बी.बी.ए., एल.एल.बी.)
कुरुक्षेत्र,13 जुलाई : दिल्ली उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में प्रैक्टिसरत अधिवक्ता
शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला आवासीय सोसाइटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन सोसाइटियों का निर्माण आवासीय उपयोग के लिए किया जाता है, ताकि निवासी सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में रह सकें। किंतु हाल के वर्षों में अनेक सोसाइटियों में आवासीय परिसर के भीतर अवैध गोदाम (वेयरहाउस) संचालित करने तथा बेसमेंट का अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। इससे न केवल भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं, बल्कि निवासियों के जीवन एवं संपत्ति के लिए भी बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाता है।
आवासीय सोसाइटी का उपयोग स्वीकृत भवन योजना (Sanctioned Building Plan) और भवन उपविधियों के अनुरूप होना आवश्यक है। यदि किसी आवासीय भवन के बेसमेंट का उपयोग गोदाम, व्यापारिक गतिविधियों या ज्वलनशील वस्तुओं के भंडारण के लिए किया जाता है, तो यह संबंधित भवन उपविधियों तथा नगर निकायों के नियमों का उल्लंघन हो सकता है। दिल्ली में यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज़, 2016 के अनुसार बेसमेंट के उपयोग पर स्पष्ट नियम निर्धारित हैं।
अवैध गोदामों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री, रसायन अथवा अन्य सामान रखा जाता है। ऐसी स्थिति में आग लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यदि आग लग जाए तो धुआँ पूरे भवन में फैल सकता है, निकासी मार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं और जान-माल की भारी हानि हो सकती है। यही कारण है कि न्यायालय समय-समय पर भवन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने पर बल देता रहा है।
यदि किसी सोसाइटी में बिना स्वीकृति के गोदाम बनाया गया है, बेसमेंट का अनधिकृत उपयोग हो रहा है या भवन योजना का उल्लंघन किया गया है, तो संबंधित नगर निगम या सक्षम प्राधिकरण निरीक्षण कर नोटिस जारी कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर अवैध निर्माण को सील किया जा सकता है अथवा ध्वस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने अनेक मामलों में स्पष्ट किया है कि ऐसा अवैध निर्माण जिसे कानून के अनुसार नियमित (Regularise) नहीं किया जा सकता, उसे बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यदि किसी आवासीय सोसाइटी में इस प्रकार का अवैध निर्माण या गोदाम संचालित हो रहा है, तो निवासी संबंधित नगर निगम, अग्निशमन विभाग, विकास प्राधिकरण अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तो उपलब्ध कानूनी उपायों के अनुसार सक्षम न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अवैध और असुरक्षित भवनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए संबंधित प्राधिकरणों को समयबद्ध निरीक्षण और कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और अवैध निर्माण के प्रति किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है।
अंततः यह समझना आवश्यक है कि आवासीय सोसाइटी केवल रहने के लिए होती है। यदि उसका उपयोग अवैध गोदाम, अनधिकृत व्यापारिक गतिविधियों या भवन योजना के विपरीत किया जाता है, तो इससे पूरे परिसर की सुरक्षा प्रभावित होती है। इसलिए प्रत्येक निवासी का दायित्व है कि वह ऐसे उल्लंघनों की सूचना संबंधित प्राधिकरण को दे और सुरक्षित तथा कानूनसम्मत आवासीय वातावरण बनाए रखने में सहयोग करे।
लेखिका अधिवक्ता सुचेता नाथ (बी.बी.ए.,एल.एल.बी.)
दिल्ली उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में प्रैक्टिसरत अधिवक्ता
विधिक स्तंभकार
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