
”सादगी और निष्पक्ष राजनीति के प्रतीक थे आलमबदी साहब, उनकी कमी हमेशा खलेगी” — मौलाना आमिर रशादी मदनी
आज़मगढ़:
वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व विधायक आलमबदी आज़मी के इंतकाल से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल (ROC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने गहरे दुख और रंज का इज़हार करते हुए इसे समाज और जनजीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
”राजनीति नहीं, जनसेवा था उनका मकसद”
शोक संदेश जारी करते हुए मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि मरहूम आलमबदी आज़मी साहब ने अपनी पूरी ज़िंदगी बेहद सादगी, ईमानदारी और निष्ठा के साथ जनता की सेवा में गुज़ार दी।
”वह केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं थे, बल्कि उसूलों की राजनीति के मिसाल थे। उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को जनहित से ऊपर नहीं रखा। हमेशा आम लोगों के सुख-दुख में शरीक रहना और उन्हें इंसाफ दिलाना ही उनकी राजनीति का मुख्य मकसद था।”
— मौलाना आमिर रशादी मदनी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल)
पुराना आत्मीय संबंध और सादगी का ज़िक्र
मौलाना रशादी ने अपने पुराने ताल्लुकात को याद करते हुए कहा कि आलमबदी साहब का साफ़-सुथरा चरित्र और ख़ुलूस (अपनत्व) ही वजह थी कि वे समाज के हर वर्ग में समान रूप से लोकप्रिय और सम्मानित थे। उनकी सादगी और सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
मगफ़िरत और सब्र की दुआ
मौलाना रशादी ने अल्लाह ताला की बारगाह में दुआ करते हुए कहा:
“अल्लाह ताला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता करे, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उनके परिजनों व चाहने वालों को इस असीम दुख को सहने की ताक़त (सब्र-ए-जमील) अता फ़रमाए। इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।”


