
एआई ने रेडियो प्रसारण को दी नई गति : प्रो. बिंदु शर्मा।
सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए जिम्मेदारी से करें एआई का उपयोग : संजीव दोसांझ।
रेडियो प्रसारण ने भारत के जन-जन को आगे बढ़ाया : जैनेन्द्र सिंह।
ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का उचित मानकों के साथ उपयोग करें विद्यार्थी : डॉ. धर्मेंद्र दुबे।
मीडिया संस्थान में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के कुशल मार्गदर्शन में जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमसीएमटी) के मिनी सभागार में ’’नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डे’’ के अवसर पर ब्रॉडकास्टिंग इन एआई एरा विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मीडिया विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में प्रसारण माध्यमों की बदलती भूमिका, जिम्मेदार पत्रकारिता तथा रचनात्मक संचार के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने विद्यार्थियों को नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डे की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सच्ची रचनात्मकता केवल सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से नहीं, बल्कि आत्मिक चिंतन, अध्ययन और समाज से जुड़ाव से विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों, संस्कृति और समाज से जुड़े रहें तथा व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए रेडियो एवं अन्य प्रसारण माध्यमों के गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रमों को सुनने और समझने की आदत विकसित करें।
संस्थान की निदेशिका प्रो. बिंदु शर्मा ने अतिथियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य उद्योग और अकादमिक जगत के बीच समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को रेडियो प्रसारण के इतिहास, उसकी विकास यात्रा और वर्तमान तकनीकी बदलावों को समझना चाहिए, ताकि वे एआई आधारित प्रसारण की संभावनाओं का बेहतर उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत में रेडियो प्रसारण ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर हरित क्रांति, तकनीकी विकास और सामाजिक जागरूकता तक देश को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज एआई ने रेडियो प्रसारण को नई गति प्रदान की है और भारतीय ब्रॉडकास्टिंग संस्थान आधुनिक तकनीकों के साथ स्वयं को निरंतर सशक्त बना रहे हैं।
भारत की ब्रॉडकास्टिंग सेवा के 100 वर्ष की ओर ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी जैनेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत की ब्रॉडकास्टिंग सेवा अगले वर्ष अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रही है। रेडियो ने सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के माध्यम से देश के जन-जन तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि एआई के आगमन से रेडियो की मूल पहचान प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि नई तकनीकों के समावेश से इसकी कार्यक्षमता और प्रभावशीलता बढ़ी है। टू-वे कम्युनिकेशन की क्षमता के कारण रेडियो आज भी लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बना हुआ है।
सही प्रॉम्प्ट और जिम्मेदार उपयोग है सबसे महत्वपूर्ण
पूर्व स्टेशन निदेशक, ऑल इंडिया रेडियो, चंडीगढ़ संजीव दोसांझ’’ ने कहा कि एआई का उपयोग ईमानदारी, उत्तरदायित्व और राष्ट्रहित की भावना से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रामक सूचनाएँ प्रायः गलत उद्देश्य और गलत प्रॉम्प्ट के कारण उत्पन्न होती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को प्रभावी प्रॉम्प्ट लिखना सीखना चाहिए तथा केवल प्रमाणिक और उपयोगी सूचनाओं का ही प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई तभी समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा जब उसका प्रयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाए।
ब्रॉडकास्टिंग का उद्देश्य समाज को जोड़ना
सेंट्रल यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा के वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र दुबे’’ ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि से ही श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश के रूप में प्रथम ब्रॉडकास्टिंग का संदेश विश्व तक पहुँचा, जो आज एआई युग तक विकसित हो चुका है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसी ब्रॉडकास्टिंग को बढ़ावा देना चाहिए जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में सहायक हो। उन्होंने तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. आबिद अली’’ ने किया। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि तीव्र प्रतिस्पर्धा और एआई के दौर में भी ब्रॉडकास्टिंग संस्थानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सटीक, प्रमाणिक और जनहितकारी सूचनाओं को समाज तक पहुँचाना है। सही सूचना ही सशक्त समाज और विकसित भारत की आधारशिला है।
इस अवसर पर संस्थान के समस्त शिक्षकगण, तकनीकी स्टाफ, शोधार्थी तथा जनसंचार, मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स एंड एनिमेशन तथा प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया।
आईएमसीएमटी में मनाया जाएगा नो मोबाइल डे, विद्यार्थियों को दी जाएँगी फील्ड रिपोर्टिंग डायरी।
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशिका ’’प्रो. बिंदु शर्मा’’ ने घोषणा की कि नए शैक्षणिक सत्र से संस्थान में प्रत्येक सप्ताह एक दिन नो मोबाइल डे के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन विद्यार्थी मोबाइल फोन के बजाय प्रत्यक्ष अवलोकन, संवाद और लेखन पर ध्यान देंगे। साथ ही फील्ड रिपोर्टिंग के लिए विद्यार्थियों को विशेष डायरी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनमें अवलोकन क्षमता, नोट्स बनाने की आदत तथा रचनात्मक लेखन कौशल का विकास हो सके।


