
इस्कॉन द्वारा हरिनाम संकीर्तन, पुष्पवर्षा और क्रेन के माध्यम से जगत के नाथ को अर्पित किए गए 56 भोग, पुष्पवर्षा और स्वागत मंचों से हुआ भव्य अभिनंदन; नगर बना भक्तिमय।
थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 24 जुलाई : धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में शुक्रवार को इस्कॉन द्वारा आयोजित भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी के दिव्य रथ के दर्शन एवं रस्सी खींचने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। पूरे नगर में “जय जगन्नाथ”, “हरे कृष्ण हरे कृष्ण” और हरिनाम संकीर्तन की गूंज सुनाई देती रही। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने इस दिव्य उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योतिसर स्थित इस्कॉन के श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर में भगवान की विशेष महाआरती एवं राजभोग अर्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। सायंकाल ब्रह्मसरोवर तट से भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी का भव्य रथ नगर भ्रमण के लिए निकला, जिसे हजारों भक्तों ने प्रेमपूर्वक रस्सियों से खींचा।
पुष्पवर्षा, स्वागत मंच और हरिनाम संकीर्तन बने आकर्षण
रथ यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा भगवान का भव्य स्वागत किया गया। अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया। रथ के आगे-आगे हरिनाम संकीर्तन मंडलियां मधुर कीर्तन करती हुई चल रही थीं, जबकि भक्त नृत्य करते हुए भगवान के नाम का गुणगान कर रहे थे। संपूर्ण मार्ग भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय, फल एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। रथ यात्रा मार्ग पर सैकड़ों स्वयंसेवकों ने सेवा संभालते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
क्रेन से अर्पित किए गए 56 भोग।
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को विशेष रूप से 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जब क्रेन की सहायता से ऊंचाई पर विराजमान भगवान को भव्य 56 भोग समर्पित किए गए। भक्तों ने जयघोष एवं हरिनाम संकीर्तन के बीच भगवान को भोग अर्पित होते हुए देखा और दिव्य दर्शन का लाभ प्राप्त किया।
मुख्य अतिथियों ने खींची रथ की रस्सी, लिया भगवान का आशीर्वाद।
रथ यात्रा में हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री श्री सुभाष सुधा जी, मुख्यमंत्री कार्यालय प्रभारी श्री कैलाश सैनी जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। अतिथियों ने भगवान जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की आरती कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा रथ की रस्सी खींचकर यात्रा में भाग लिया। उन्होंने इस्कॉन द्वारा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
विभिन्न जिलों और राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, बनी राष्ट्रीय एकता की अनुपम झलक।
भगवान जगन्नाथ की इस भव्य रथ यात्रा में केवल कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि हरियाणा के अनेक जिलों से श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, रोहतक और चंडीगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन और रथ यात्रा में सहभागिता हेतु पहुंचे।
हरियाणा के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, असम तथा देश के अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु इस पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र पहुंचे। विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आए भक्तों ने एक साथ हरिनाम संकीर्तन करते हुए भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की।
भक्तों ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में सम्मिलित होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और आध्यात्मिक प्रेरणा का विषय है। पूरे मार्ग में “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के उद्घोषों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया और राष्ट्रीय एकता तथा आध्यात्मिक सद्भाव का सुंदर संदेश दिया।
रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
इस्कॉन कुरुक्षेत्र के उपाध्यक्ष श्रीमान मोहन गौरचंद्र प्रभुजी ने बताया कि जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान की असीम करुणा का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर सभी को दर्शन देते हैं। रथ यात्रा में सम्मिलित होने, भगवान के दर्शन करने अथवा रथ की रस्सी खींचने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है तथा जीवन में शुभता का संचार होता है।
1967 में सैन फ्रांसिस्को की एक साधारण रथ यात्रा से शुरू हुई यह परंपरा आज विश्वव्यापी आंदोलन बन चुकी है। श्रिला प्रभुपाद की प्रेरणा से भगवान जगन्नाथ का रथ अब एशिया, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित विश्व के 100 से अधिक शहरों में निकलता है।
विशाल भंडारा प्रसाद वितरण।
रथ यात्रा के समापन उपरांत सेक्टर 13 स्थित कम्युनिटी सेंटर में विशाल भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर लगभग 8,000 श्रद्धालुओं और यात्रियों ने भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण किया। स्वयंसेवकों द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से प्रसाद वितरण किया गया। इस्कॉन के अनुसार भगवान का प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि भगवान की कृपा का स्वरूप है, जिसे ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। पूरे आयोजन के दौरान सेवा, सद्भाव और अतिथि-सत्कार की भावना विशेष रूप से देखने को मिली।
श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर परियोजना का नया अध्याय।
इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष श्रीमान साक्षी गोपाल प्रभुजी ने बताया कि इस वर्ष की रथ यात्रा विशेष महत्व रखती है क्योंकि हाल ही में श्री श्री गौर- निताई एवं श्री श्री जगन्नाथ-बलदेव-सुभद्रा महारानी नए मंदिर परिसर में विराजमान हुए हैं। उन्होंने कहा कि श्रील प्रभुपाद एवं उनके शिष्य परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज द्वारा देखा गया विश्वस्तरीय श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर का सपना अब तेजी से साकार हो रहा है और यह परियोजना विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से यह रथ यात्रा भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत उत्सव बन गई।
अंत में कम्यूनिटी सेंटर, सेक्टर-13 में विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

