
सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
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मुंबई,15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आइडियल पत्रकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार मिश्रा ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक धर्म, जाति या वर्ग के लोगों के संघर्ष का परिणाम नहीं, बल्कि देश के विभिन्न समुदायों, जातियों और क्षेत्रों के लोगों के सामूहिक संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। ऐसे में आज देश के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होने की है।अजय कुमार मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस के संदेश में कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अलग-अलग धर्मों, जातियों और सामाजिक समूहों के लोगों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया। स्वतंत्र भारत की नींव इसी सामूहिक संघर्ष और एकता पर रखी गई थी। इसलिए वर्तमान समय में भी देश की मजबूती के लिए सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीति का उद्देश्य समाज को बांटना नहीं बल्कि जनता के हितों को आगे बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व से भी अपील की कि धर्म, जाति और सामाजिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने के बजाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, विकास, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे वास्तविक मुद्दों पर राजनीति की जाए।मिश्रा ने अपने संदेश में कहा कि आज समाज के सामने यह सवाल गंभीरता से विचार करने का है कि क्या राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को अलग-अलग खांचों में बांटना देशहित में है। उन्होंने कहा कि कभी धार्मिक पहचान के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास होता है तो कभी जातिगत आधार पर लोगों के बीच दूरी बढ़ाई जाती है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम, अगड़ा-पिछड़ा और दलित-पिछड़ा जैसे विभाजनकारी विमर्श यदि केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाएं तो इससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है और विकास की गति प्रभावित होती है।उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता उसकी विविधता में एकता है। यहां अलग-अलग धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और सामाजिक समूहों के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं। यही विविधता भारत की ताकत है। इस विविधता को संघर्ष का कारण बनाने के बजाय इसे राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलने की आवश्यकता है।आइडियल पत्रकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाज में राजनीतिक मतभेद होना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक मतभेदों को सामाजिक दुश्मनी में बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को किसी भी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करने का अधिकार है, लेकिन देश के नागरिकों के बीच आपसी सम्मान, भाईचारा और संवाद की भावना कायम रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के नारों तक सीमित रहने का अवसर नहीं है। यह दिन हमें उन मूल्यों की याद दिलाता है जिनके आधार पर स्वतंत्र भारत का निर्माण हुआ। स्वतंत्रता, समानता, न्याय, बंधुत्व और लोकतांत्रिक अधिकार भारतीय गणराज्य की बुनियादी ताकत हैं। इन मूल्यों को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।मिश्रा ने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान देशवासियों के सामने एक साझा लक्ष्य था—भारत को विदेशी शासन से मुक्त कराना। उस समय लोगों ने धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर स्वतंत्रता के संघर्ष में योगदान दिया। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग किया और देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्र भारत का सपना देखा। आज उन बलिदानों को याद करते हुए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश में सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक भावना मजबूत बनी रहे।उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग स्वयं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का समान भागीदार समझे। गरीब, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी, युवा, महिलाएं, विद्यार्थी, पत्रकार, उद्यमी और समाज के अन्य सभी वर्ग देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाते हैं। किसी भी वर्ग को कमजोर करके देश मजबूत नहीं हो सकता। अजय कुमार मिश्रा ने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे नफरत और अफवाहों से बचें तथा तथ्यों और विवेक के आधार पर अपनी राय बनाएं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी संदेश या वीडियो को बिना सत्यापन के आगे बढ़ाना समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है। युवाओं को चाहिए कि वे तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक संवाद, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए करें।उन्होंने पत्रकारों और मीडिया से भी जिम्मेदारीपूर्वक भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वे जनता तक तथ्यपरक एवं संतुलित जानकारी पहुंचाएं। समाचारों के माध्यम से समाज में जागरूकता पैदा की जा सकती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया जा सकता है। इसलिए पत्रकारिता को किसी भी प्रकार की नफरत, अफवाह और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने से बचना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि सत्ता किसी भी दल या व्यक्ति के लिए स्थायी नहीं होती। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और जनता समय-समय पर अपने मताधिकार के माध्यम से सरकारों का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना है कि जब सत्ता अहंकार का रूप लेने लगे तो जनता का जागरूक और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।उन्होंने अपने संदेश में नागरिकों से अपील की कि वे लोकतंत्र में अपने मताधिकार का जिम्मेदारी से प्रयोग करें। चुनाव के समय जाति, धर्म, व्यक्तिगत प्रभाव अथवा भावनात्मक नारों के बजाय उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के काम, नीतियों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत को आगे ले जाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक बहस को वास्तविक विकास के मुद्दों की ओर ले जाना होगा। रोजगार के अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों की स्थिति, महंगाई, महिला सुरक्षा, युवाओं का भविष्य, छोटे कारोबारों की मजबूती, बुनियादी ढांचे का विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे देश के प्रत्येक नागरिक से जुड़े हैं। इन विषयों पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा की आवश्यकता है। अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि किसी व्यक्ति की धार्मिक या जातिगत पहचान उसके राष्ट्रप्रेम और नागरिक अधिकारों का निर्धारण नहीं करती। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि संविधान की भावना का सम्मान करते हुए सभी नागरिकों को एक-दूसरे के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता का अर्थ मतभेदों को समाप्त करना नहीं बल्कि मतभेदों के बावजूद साथ चलने की क्षमता विकसित करना है। लोकतंत्र में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है। आवश्यकता इस बात की है कि विचारों के अंतर को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाए और किसी भी मतभेद को हिंसा, घृणा या सामाजिक बहिष्कार का कारण न बनने दिया जाए।उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद भारत ने अनेक चुनौतियों का सामना किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा। यह उपलब्धि किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सामूहिक ताकत का परिणाम है। आज भी देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन यदि नागरिक एकजुट होकर उनका सामना करें तो भारत को और अधिक मजबूत, विकसित और समावेशी राष्ट्र बनाया जा सकता है।मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाते हैं। देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की नहीं है। प्रत्येक नागरिक अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करके राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। शिक्षक अच्छी शिक्षा देकर, डॉक्टर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देकर, किसान अन्न उत्पादन करके, श्रमिक अपने श्रम से और पत्रकार तथ्यपरक पत्रकारिता के माध्यम से देश की सेवा कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके नागरिक हैं। यदि देश का नागरिक समाज जागरूक, शिक्षित, जिम्मेदार और एकजुट रहेगा तो किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति समाज को लंबे समय तक कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आपसी संबंधों को मजबूत बनाए रखें और पड़ोसी, मित्र तथा सहकर्मी के रूप में एक-दूसरे का सम्मान करें।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का अवसर हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम देश की एकता और अखंडता को मजबूत करेंगे, संविधान के मूल्यों का सम्मान करेंगे और समाज में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देंगे। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे धर्म और जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव से ऊपर उठकर देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि देश की प्रगति तभी सार्थक होगी जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अवसरों और न्यायपूर्ण व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि मजबूत राष्ट्र वही होता है जहां नागरिकों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें और किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर पीछे न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा जब प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे। देश की एकता, सामाजिक सद्भाव, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, कानून का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास जैसे विषय नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि देशवासियों को यह तय करना होगा कि वे विभाजन की राजनीति के साथ खड़े होंगे या विकास, शांति और सामाजिक एकता के साथ। उन्होंने जनता से अपील की कि राजनीतिक दलों और नेताओं से जवाब मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है और जनता को अपने मुद्दों पर सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में सवाल पूछना और सरकार के काम का मूल्यांकन करना नागरिकों का अधिकार है।अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि देश को ऐसी राजनीति की आवश्यकता है जो समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का काम करे। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन प्रतिस्पर्धा का स्तर ऐसा होना चाहिए जिसमें जनता के हित सर्वोपरि रहें। उन्होंने कहा कि सत्ता का उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने देश के सभी नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस पर आपसी भाईचारा बनाए रखने और देश के विकास में योगदान देने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता जिन लोगों के त्याग और बलिदान से मिली, उनके सपनों का भारत तभी बनाया जा सकता है जब नागरिक एक-दूसरे के साथ सम्मान और सहयोग की भावना से रहें।उन्होंने कहा कि भारत की आजादी में सभी धर्मों और सभी जातियों के लोगों ने अपना योगदान दिया था। इसलिए स्वतंत्रता दिवस किसी एक समुदाय का पर्व नहीं, बल्कि पूरे देश का राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन हमें स्वतंत्रता संग्राम के सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद करना चाहिए और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। अंत में अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि देशवासियों को विभाजन और वैमनस्य से ऊपर उठकर एकता, शांति, भाईचारे और विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास सामाजिक सद्भाव का वातावरण बनाने में योगदान दें और भारत को मजबूत बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं।आइडियल पत्रकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार मिश्रा ने देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर लिया गया एकता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


