आचार्य चाणक्य का जीवन ‘वित्तीय शुचिता’ का भी आदर्श सन्देश देता है : डॉ. शमशेर जमदग्रि

चंडीगढ़, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 19 अप्रैल : ‘यह कोई जादू-टोना नहीं है। जब आप आए, मैं राज्य का कार्य कर रहा था एवं दीपक भी राज्य के पैसों 8ईसे भरे गए तेल वाला जल रहा था। मैंने यह मानते हुए कि आपकी भेंट राज्य के महामंत्री से नहीं, बल्कि ब्राह्मण चाणक्य से है, वह दीपक बुझा दिया एवं अपने पैसों से भरे गए तेल वाला दीपक जला लिया। इस दौरान जब राज्य के कार्यों से संबंधित चर्चा हुई तो दीपक भी राज्य के पैसों से भरे हुए तेल वाला जलाया गया एवं जब व्यक्तिगत वार्ता हुई तो दीपक भी अपने पैसों से भरे हुए तेल वाला जलाया गया। यही आदर्श राजनीति है कि अपना काम तो अपना खर्च एवं राज्य का काम तो राज्य का खर्च।
भारतवर्ष के महानतम राजनीतिक चिन्तक आचार्य चाणक्य द्वारा उपरोक्त ऐतिहासिक कथन सिकंदर महान के सेनापति सेल्युकस को उस भेंट वार्ता के दौरान कहा गया था, जब सिकंदर महान के आदेशानुसार उनका सेनापति सेल्युकस आचार्य चाणक्य से मिलने उनके पास गया था और यह देखकर डर गया था कि आचार्य चाणक्य कभी एक दीपक जला रहे हैं एवं कभी दूसरा दीपक जला रहे हैं, अर्थात्‌ वे मुझ पर जरूर कोई जादू-टोना कर रहे हैं एवं इस कारण मैं किसी गंभीर संकट में न फंस जाऊ।’
भारतमातरम राष्ट्रपीठ, नई दिल्ली के सूत्रधार डॉ. शमशेर जमदग्रि (अपर आयुक्त, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) – भारतवादी साहित्यकार, नई दिल्ली द्वारा 19 अप्रैल को भगवान श्रीपरशुरामजी के अवतारोत्सव एवं अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क, मुम्बई में श्री समर्थ व्यायाम मन्दिर, मुम्बई द्वारा आयोजित ’52वें समर्थ वार्षिक क्रीड़ा ग्रीष्म प्रशिक्षण शिविर- 2026′ के ध्वजारोहण के शुभ अवसर पर ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में अपने विशिष्ट संबोधन का श्रीगणेश उपरोक्त ऐतिहासिक प्रसंग से किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ.जमदग्रि द्वारा सन्देश दिया गया कि हमारा महान राष्ट्र भारतवर्ष आचार्य चाणक्य जैसे राष्ट्रनायकों की शिक्षा एवं चिंतन पर आधारित विश्व का महानतम राष्ट्र है और आचार्य चाणक्य का जीवन एवं चिंतन हमें अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाओं के साथ ‘वित्तीय शुचिता’ का भी आदर्श सन्देश प्रदान करता है, जिसके लिए उपरोक्त एकमात्र ऐतिहासिक प्रसंग ही पर्याप्त है। फलतः, हम भारतवादियों को ऐसे आदर्श संदेशों को न केवल ग्रहण करना चाहिए, बल्कि ऐसे शिविरों के माध्यम से उन्हें अपने जीवन में स्थायी स्थान भी प्रदान कर देना चाहिए, ताकि अपना महान राष्ट्र भारतवर्ष निकट भविष्य में पुनः विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित हो सके।
सम्प्रति समर्थ वार्षिक क्रीड़ा ग्रीष्म प्रशिक्षण शिविर में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे श्री स्वप्निल नंदकुमार वाडेकर – संस्थापक अध्यक्ष, वेद प्रतिष्ठान, मुम्बई द्वारा भी ‘अक्षय तृतीया’ की हार्दिक शुभकामनायें के साथ आयोजक मंडल को ऐसे उपयोगी शिविरों के आयोजन के लिए अपना हार्दिक साधुवाद प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि सम्प्रति महत्वपूर्ण शिविर का आयोजन श्री उदय विश्वनाथ देशपांडे (पदमश्री), जो श्री समर्थ व्यायाम मन्दिर, मुम्बई के महासचिव हैं, द्वारा किया गया है, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में बाल एवं बालिकाएं ‘स्वस्थ तन संग स्वस्थ मन’ की जीवनोपयोगी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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