माँ दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना सिद्धार्थी सम्वत व नवरात्रि में करने से सुख शान्ति श्रद्धा अनुसार मिलती है : डॉ. मिश्रा

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।

कुरुक्षेत्र : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पीठाधीश व हार्मनी ऑकल्ट वास्तु जोन पिपली के चैयरमेन ज्योतिष व वास्तु आचार्य डॉ. मिश्रा ने बताया कि 30 मार्च 2025 रविवार से नया सम्वत 2082, सिद्धार्थी नाम से आरंभ होने वाला है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया हिंदू वर्ष शुरू हो जाता है। प्रति वर्ष विक्रम संवत का नया साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन की थी। नवरात्रि व्रत भी इसी तिथि से प्रारंभ होता है।
2082 सम्वत के राजा सूर्य व मंत्री सूर्य है। भारत देश की आर्थिक,सामाजिक व राजनैतिक उन्नति होगी I नवसंवत्सर के राजा सूर्य होने से तकनीकी क्षेत्र में देश को बड़ी उपलब्धि प्राप्त होगी। धन-धान्य में वृद्धि होगी। मंत्री सूर्य होने के प्रभाव से लोगों में देश भक्ति बढ़ेगी।
रविवार को प्रातः काल शुद्ध स्नान करके संवतसर पूजन , घटस्थापन, ॐ कार सहित पंचदेव पूजन करना चाहिए I श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ व नवार्ण मंत्र और विशेष मंत्रों का जप साधक अपने पूजा स्थान में श्रद्धा पूर्वक करें I श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज ने माँ दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की जो मुख्य ग्रंथ चण्डी दी वार नाम से प्रसिद्ध है I
30 मार्च से 6 अप्रैल 2025 तक विशेष नवरात्रि व्रत रहेगा I माँ दुर्गा की पूजा अर्चना महोत्सव व भगवान राम का जन्मोत्सव चैत्र नवरात्रि में मनाया जाता है I
साधक विशेष नवरात्रों में क्या करें :
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन मां दुर्गा के बालिका अवतार की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है। इस दिन भक्त पीला वस्त्र पहनकर मां को घी चढ़ाते हैं और उनकी अराधना करते हैं।
नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्माचारिणी रूप में पूजा की जाती है इस दिन भक्त हरा वस्त्र पहनकर उन्हें शक्कर का भोग लगाते हैं।
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त मां को दूध या खीर चढ़ाते हैं। कहा जाता है ऐसा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
चौथा दिन होता है मां कुष्मांडा का। इस दिन मां को मालपुए का भोग लगाया जाता है और नारंगी रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। ऐसा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कन्दमाता की पूजा की जाती है। इस दिन उजला वस्त्र पहनकर शक्ति रूपी मां दुर्गा को केले का भोग लगाया जाता है।
छठे दिन मां कात्यायिनी की पूजा होती है। इस दिन लाल कपड़ा पहनकर मां को शहद का भोग लगाया जाता है। जिससे मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सातवें दिन पूजा की जाती है मां कालरात्रि की। इस दिन नीला वस्त्र पहनकर मां वो गुड़ का भोग लगाया जाता है और ब्राह्मणों को भी दान किया जाता है।
नवरात्र का आठवां दिन होता है मां महागौरी का। इस दिन गुलाबी वस्त्र पहनकर मां को नारियल का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।
नवरात्र के नवें दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। इस दिन बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर मां को तिल का भोग लगाया जाता है।

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